• 26-04-2026 06:00 pm to 26-04-2026 09:00 pm

क्या गाँव की लोकतांत्रिक सत्ता अब डेटा के हाथों में जा रही है?

शब्दभूमि प्रकाशन द्वारा दिनांक 29 अप्रैल को, राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस (24 अप्रैल) के उपलक्ष्य में एक समकालीन एवं विचारोत्तेजक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है, जिसका विषय है - क्या गाँव की लोकतांत्रिक सत्ता अब डेटा के हाथों में जा रही है?

भारत का लोकतंत्र अपनी जड़ों में गाँवों की ग्राम सभाओं और पंचायतों से संचालित होता है, जहाँ निर्णय सामूहिक विचार-विमर्श और जनसहमति के आधार पर लिए जाते हैं। किंतु डिजिटल युग के इस दौर में, प्रशासनिक प्रक्रियाएँ तेजी से डेटा, एल्गोरिद्म और तकनीकी प्लेटफॉर्म पर निर्भर होती जा रही हैं।

सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, लाभार्थियों के चयन, और संसाधनों के वितरण में अब डेटा-आधारित प्रणालियाँ निर्णायक भूमिका निभा रही हैं। ऐसे में एक महत्वपूर्ण प्रश्न उभरता है - क्या पंचायतें अब भी निर्णय ले रही हैं, या वे केवल डेटा प्रविष्टि और कार्यान्वयन की इकाई बनती जा रही हैं?

यह संगोष्ठी इसी जटिल द्वंद्व की पड़ताल करेगी, जहाँ एक ओर डिजिटल तकनीक पारदर्शिता, दक्षता और निगरानी को बढ़ावा देती है, वहीं दूसरी ओर यह स्थानीय लोकतंत्र, सहभागिता और स्वायत्तता के सामने नई चुनौतियाँ भी प्रस्तुत करती है।

🎯 संगोष्ठी के प्रमुख प्रश्न

  • क्या डिजिटल गवर्नेंस ग्राम सभा की भूमिका को सीमित कर रहा है?
  • क्या डेटा-आधारित निर्णय वास्तव में निष्पक्ष होते हैं, या वे सामाजिक असमानताओं को दोहराते हैं?
  • पंचायतों में तकनीक का उपयोग सशक्तिकरण है या नियंत्रण का नया माध्यम?

🎯 संगोष्ठी के उद्देश्य

  • पंचायतों में डिजिटल परिवर्तन के प्रभाव का विश्लेषण करना
  • डेटा और लोकतंत्र के बीच संतुलन की आवश्यकता को समझना
  • ग्राम सभा की स्वायत्तता और भागीदारी को सुदृढ़ करने पर विचार करना
  • एक समावेशी और न्यायपूर्ण ग्रामीण शासन मॉडल की दिशा में संवाद स्थापित करना

🌐 कौन भाग ले सकते हैं?

शोधार्थी, विधि के विद्यार्थी, पंचायत प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, तकनीकी विशेषज्ञ एवं सभी जागरूक नागरिक

यह संगोष्ठी केवल तकनीकी बदलाव पर चर्चा नहीं, बल्कि लोकतंत्र की मूल आत्मा जनभागीदारी और स्वायत्तता के भविष्य पर एक गंभीर चिंतन है।