‘केदारनाथ सिंह का दूसरा घर’ हिंदी के सुप्रसिद्ध कवि केदारनाथ सिंह के गद्य-संसार पर केंद्रित एक महत्त्वपूर्ण आलोचना-कृति है, जिसे चर्चित आलोचक और साहित्यकार मृत्युंजय पाण्डेय ने लिखा है। यह पुस्तक हिंदी आलोचना में एक विशिष्ट हस्तक्षेप के रूप में सामने आती है, क्योंकि अब तक केदारनाथ सिंह की कविता पर तो व्यापक चर्चा हुई, किंतु उनके गद्य-साहित्य का समग्र और स्वतंत्र अध्ययन लगभग अनुपस्थित रहा। लेखक ने इसी रिक्ति को भरने का सार्थक प्रयास किया है।
पुस्तक का मूल विचार अत्यंत रोचक है—यदि कविता केदारनाथ सिंह का पहला घर है, तो उनका गद्य उनका ‘दूसरा घर’ है। मृत्युंजय पाण्डेय मानते हैं कि इस दूसरे घर में प्रवेश किए बिना केदारनाथ सिंह की रचनात्मक चेतना, वैचारिक संरचना और साहित्यिक व्यक्तित्व को पूरी तरह समझा नहीं जा सकता। उनके निबंध, व्याख्यान, संस्मरण, आलोचनात्मक टिप्पणियाँ और साहित्यिक वक्तव्य उस रचनाकार के अंतरंग संसार के द्वार खोलते हैं, जिसकी कविताएँ भारतीय जनजीवन, लोक-संस्कृति और आधुनिक संवेदना की अद्वितीय अभिव्यक्ति हैं।
इस पुस्तक में लेखक ने केदारनाथ सिंह के गद्य को केवल सहायक साहित्य नहीं माना, बल्कि उसे उनकी रचनात्मक दृष्टि का स्वतंत्र और सशक्त आयाम सिद्ध किया है। यहाँ पाठक को भाषा, संस्कृति, स्मृति, लोकजीवन, गाँव, शहर, साहित्य, इतिहास और मनुष्य के प्रति कवि की दृष्टि का विस्तृत परिचय मिलता है। गद्य के माध्यम से केदारनाथ सिंह का वह चिंतन सामने आता है, जो उनकी कविताओं के पीछे कार्यरत वैचारिक ऊर्जा को समझने में सहायता करता है।
मृत्युंजय पाण्डेय ने अत्यंत सूक्ष्म विश्लेषण के साथ यह दिखाया है कि केदारनाथ सिंह की रचनाशीलता का केंद्र मनुष्य, उसकी भाषा और उसकी सांस्कृतिक स्मृतियाँ हैं। चाहे कविता हो या गद्य, उनकी दृष्टि भारतीय समाज की जड़ों से जुड़ी रहती है। पुस्तक यह भी स्पष्ट करती है कि केदारनाथ सिंह का साहित्य ग्रामीण और शहरी जीवन के बीच एक जीवंत संवाद रचता है तथा आधुनिकता और परंपरा के बीच संतुलन स्थापित करता है।
यह कृति केवल आलोचना नहीं, बल्कि एक बड़े साहित्यकार के रचनात्मक व्यक्तित्व की खोज है। शोधार्थियों, अध्यापकों, विद्यार्थियों तथा हिंदी साहित्य के गंभीर पाठकों के लिए यह पुस्तक एक उपयोगी संदर्भ-ग्रंथ का कार्य करती है। केदारनाथ सिंह के साहित्य को नए परिप्रेक्ष्य में समझने और उनके गद्य की रचनात्मक महत्ता को पहचानने के लिए यह पुस्तक अत्यंत आवश्यक और संग्रहणीय है।
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