"रामकथा : आधुनिक व्याख्या एवं संभावनाएँ" हिंदी के प्रतिष्ठित चिंतक और साहित्यकार Ramgopal Bagla की एक महत्त्वपूर्ण आलोचनात्मक एवं वैचारिक कृति है, जिसमें भारतीय सांस्कृतिक चेतना के आधार-ग्रंथ रामकथा का आधुनिक दृष्टिकोण से पुनर्पाठ प्रस्तुत किया गया है। यह पुस्तक रामायण और रामकथा की परंपरा को केवल धार्मिक आख्यान के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक, नैतिक और मानवीय मूल्यों के जीवंत स्रोत के रूप में देखने का प्रयास करती है। पुस्तक का प्रकाशन 2019 में हुआ था।
इस पुस्तक में लेखक ने रामकथा के विविध आयामों का विश्लेषण करते हुए यह विचार किया है कि बदलते समय में राम, सीता, लक्ष्मण, भरत, हनुमान और अन्य पात्रों की प्रासंगिकता किस प्रकार बनी हुई है। वे रामकथा को अतीत की स्मृति मात्र न मानकर वर्तमान समाज के नैतिक, सांस्कृतिक और मानवीय संकटों से जोड़कर देखते हैं। इस दृष्टि से यह कृति परंपरा और आधुनिकता के बीच एक सार्थक संवाद स्थापित करती है।
रामगोपाल बगला का मानना है कि रामकथा भारतीय समाज की सामूहिक स्मृति और सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न अंग है। इसलिए इसकी आधुनिक व्याख्या केवल साहित्यिक आवश्यकता नहीं, बल्कि सामाजिक और वैचारिक आवश्यकता भी है। पुस्तक में रामकथा के लोकतांत्रिक मूल्यों, मानवीय संबंधों, स्त्री-दृष्टि, सामाजिक समरसता, लोक-संस्कृति तथा वैश्विक संदर्भों पर भी विचार किया गया है।
साहित्यिक दृष्टि से यह कृति आलोचना, संस्कृति-अध्ययन और भारतीय चिंतन का महत्वपूर्ण संगम है। लेखक ने पारंपरिक व्याख्याओं का सम्मान करते हुए नए प्रश्न उठाए हैं और रामकथा में निहित संभावनाओं को समकालीन संदर्भों में समझने का प्रयास किया है। यही कारण है कि यह पुस्तक केवल रामायण-अध्येताओं के लिए ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, साहित्य और समाज में रुचि रखने वाले सभी पाठकों के लिए उपयोगी सिद्ध होती है।
"रामकथा : आधुनिक व्याख्या एवं संभावनाएँ" रामकथा की शाश्वतता और उसकी नवीन अर्थवत्ता को समझने वाली एक विचारोत्तेजक कृति है, जो पाठक को परंपरा को नए दृष्टिकोण से देखने और उसके समकालीन महत्व पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित करती है।
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