RENU KA BHARAT

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₹299 20% OFF
  • Format: Paper Back
  • Publish Years: 2026
  • Total page: 160
  • Language: HINDI

"रेणु का भारत" समकालीन हिंदी आलोचना के महत्त्वपूर्ण हस्ताक्षर Mrityunjay Pandey की एक विशिष्ट आलोचनात्मक कृति है, जिसमें हिंदी के महान कथाकार Phanishwar Nath Renu के साहित्य में निहित भारत की अवधारणा का गहन विश्लेषण किया गया है। यह पुस्तक रेणु के कथा-संसार, उनकी सामाजिक दृष्टि, लोकचेतना और भारतीय जीवन के बहुरंगी स्वरूप को समझने का एक गंभीर प्रयास है।

रेणु का साहित्य भारतीय ग्राम्य जीवन, लोक-संस्कृति, जनपदीय चेतना और आम आदमी के संघर्षों का जीवंत दस्तावेज़ माना जाता है। इस पुस्तक में लेखक ने यह खोजने का प्रयास किया है कि रेणु के सपनों का भारत कैसा था, उनके साहित्य में भारतीय समाज के कौन-कौन से रूप उपस्थित हैं, और वे स्वतंत्र भारत की किन संभावनाओं तथा चुनौतियों को रेखांकित करते हैं।

मृत्युंजय पाण्डेय रेणु के उपन्यासों, कहानियों और पात्रों के माध्यम से उस भारत की पड़ताल करते हैं जो महानगरों से दूर गाँवों, कस्बों, खेतों, मेले-ठेलों, लोकगीतों और आम जनजीवन में बसता है। यह पुस्तक बताती है कि रेणु का भारत केवल भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि विविध संस्कृतियों, भाषाओं, परंपराओं और मानवीय संबंधों से निर्मित एक जीवंत सामाजिक-सांस्कृतिक संसार है।

लेखक की आलोचना-दृष्टि पाठ-केंद्रित, संतुलित और शोधपरक है। वे रेणु के साहित्य को केवल आंचलिकता के दायरे में सीमित नहीं रखते, बल्कि उसमें निहित राष्ट्रीय, सामाजिक और मानवीय सरोकारों को भी रेखांकित करते हैं। पुस्तक में रेणु की रचनाओं के माध्यम से भारतीय लोकतंत्र, लोकजीवन, सामाजिक परिवर्तन और सांस्कृतिक अस्मिता के प्रश्नों पर भी विचार किया गया है।

भाषा सहज, स्पष्ट और विचारोत्तेजक है, जिससे यह पुस्तक विद्यार्थियों, शोधार्थियों, अध्यापकों तथा रेणु साहित्य के गंभीर पाठकों के लिए समान रूप से उपयोगी बन जाती है। "रेणु का भारत" हिंदी आलोचना की उन महत्त्वपूर्ण कृतियों में शामिल है जो साहित्य के माध्यम से भारतीय समाज और संस्कृति को समझने का नया दृष्टिकोण प्रदान करती हैं।

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