- 19-04-2026 05:00 pm to 19-04-2026 06:00 pm
- आभासीय संगोष्ठी कोलकाता
War Ecology: क्या युद्ध केवल मानव नहीं, पृथ्वी के भी विरुद्ध अपराध है?
शब्दभूमि प्रकाशन द्वारा दिनांक 19 अप्रैल को, विश्व पृथ्वी दिवस (22 अप्रैल) के उपलक्ष्य में एक समकालीन एवं विचारोत्तेजक राष्ट्रीय
संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है, जिसका विषय है -
War Ecology: क्या युद्ध केवल
मानव नहीं, पृथ्वी के भी
विरुद्ध अपराध है?
आमतौर पर युद्ध को मानव हानि, राजनीतिक संघर्ष और आर्थिक क्षति के संदर्भ में देखा जाता
है, परंतु एक
महत्वपूर्ण प्रश्न अक्सर अनदेखा रह जाता है: क्या युद्ध पृथ्वी के लिए भी उतना
ही विनाशकारी है जितना मानव के लिए?
बम विस्फोट, रासायनिक हथियार, भारी सैन्य गतिविधियाँ और युद्धोत्तर पुनर्निर्माण ये सभी
प्रक्रियाएँ न केवल तत्काल विनाश करती हैं, बल्कि मिट्टी, जल, वायु और जैव
विविधता पर दीर्घकालिक और
गहरे प्रभाव छोड़ती हैं। युद्ध
के कारण उत्पन्न प्रदूषण, जंगलों की कटाई, और प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन
पृथ्वी के संतुलन को गंभीर रूप से प्रभावित करता है।
यह संगोष्ठी ‘War Ecology’ के इस उभरते हुए
विमर्श को केंद्र में रखते हुए निम्न प्रश्नों पर विचार करेगी -
- क्या युद्ध
को केवल मानवता के विरुद्ध नहीं, बल्कि पृथ्वी के विरुद्ध अपराध के रूप में
भी देखा जाना चाहिए?
- ‘Ecocide’ (पारिस्थितिक
विनाश) को क्या अंतरराष्ट्रीय कानून में अपराध का दर्जा मिलना चाहिए?
- क्या वर्तमान
वैश्विक नीतियाँ युद्ध के पर्यावरणीय प्रभावों को पर्याप्त रूप से संबोधित
करती हैं?
🎯 संगोष्ठी के उद्देश्य
- युद्ध और
पर्यावरण के बीच संबंध को समझना
- ‘Ecocide’ जैसे उभरते
कानूनी और नैतिक प्रश्नों पर विमर्श करना
- पृथ्वी-केंद्रित
दृष्टिकोण से युद्ध की पुनर्परिभाषा करना
- एक अधिक उत्तरदायी और
पर्यावरण-संवेदनशील वैश्विक नीति की आवश्यकता पर बल देना
🌐 कौन भाग ले सकते हैं?
शोधार्थी, विधि विद्यार्थी, पर्यावरणविद्, सामाजिक विज्ञान के विद्वान, पत्रकार एवं सभी जागरूक नागरिक
✨ यह संगोष्ठी केवल युद्ध की चर्चा नहीं, बल्कि पृथ्वी के अस्तित्व, मानवता और नैतिकता के बीच संबंध को समझने का एक
गंभीर प्रयास है, जहाँ सवाल केवल यह नहीं है कि युद्ध किसे नुकसान पहुँचाता है, बल्कि यह भी है कि क्या पृथ्वी स्वयं भी युद्ध की एक मौन
पीड़ित है?