• 08-03-2026 06:00 pm to 08-03-2026 09:30 pm
  • आभासीय संगोष्ठी कोलकाता

भारतीय ज्ञान परंपरा में महिलाएँ: आयुर्वेद से अंतरिक्ष तक

शब्दभूमि प्रकाशन द्वारा दिनांक 8 मार्च 2026 (रविवार) को सायं 6 बजे अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर एक राष्ट्रीय आभासी संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है, जिसका विषय है - ‘भारतीय ज्ञान परंपरा में महिलाएँ: आयुर्वेद से अंतरिक्ष तक’ (Women in Indian Knowledge Traditions: From Ayurveda to Space) भारतीय ज्ञान परंपरा सदैव से विविधता, समृद्धि और गहन बौद्धिक विरासत का प्रतीक रही है। इस परंपरा में महिलाओं की भूमिका केवल सहभागिता तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने ज्ञान, चिकित्सा, दर्शन, साहित्य और विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। प्राचीन काल में आयुर्वेद, वेद, दर्शन और साहित्य के क्षेत्र में महिलाओं की सक्रिय उपस्थिति से लेकर आधुनिक युग में विज्ञान, तकनीक और अंतरिक्ष अनुसंधान तक, महिलाओं ने निरंतर अपनी पहचान स्थापित की है। यह यात्रा केवल उपलब्धियों की नहीं, बल्कि संघर्ष, आत्मविश्वास और सशक्तिकरण की भी कहानी है। आज के समय में, जब लैंगिक समानता और महिलाओं के अधिकारों पर व्यापक चर्चा हो रही है, यह आवश्यक हो जाता है कि हम भारतीय ज्ञान परंपरा में महिलाओं की भूमिका को पुनः समझें और उसे समकालीन संदर्भ में देखें। 🎯 संगोष्ठी के प्रमुख बिंदु • भारतीय ज्ञान परंपरा में महिलाओं का ऐतिहासिक योगदान • आयुर्वेद, साहित्य, दर्शन और शिक्षा में महिला सहभागिता • आधुनिक विज्ञान, तकनीक और अंतरिक्ष क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका • परंपरा से आधुनिकता तक महिला सशक्तिकरण की यात्रा 🎯 संगोष्ठी के उद्देश्य • महिलाओं के बौद्धिक और वैज्ञानिक योगदान को उजागर करना • ऐतिहासिक और समकालीन संदर्भों में महिला भूमिका का विश्लेषण करना • युवा पीढ़ी को प्रेरित करना और जागरूकता बढ़ाना • ज्ञान परंपरा और आधुनिक उपलब्धियों के बीच सेतु स्थापित करना 🌐 कार्यक्रम विवरण • आयोजक: शब्दभूमि प्रकाशन • दिनांक: 8 मार्च 2026 • दिन: रविवार • समय: सायं 6 बजे • माध्यम: Zoom (आभासी संगोष्ठी) 🌐 संपर्क एवं जुड़ाव • वेबसाइट: www.theshabdbhumi.com • ईमेल: shabdbhumiprakashan@gmail.com • सोशल मीडिया: Shabdbhumi Prakashan (Instagram, Facebook, YouTube, X) ✨ यह संगोष्ठी केवल महिलाओं की उपलब्धियों का उत्सव नहीं, बल्कि ज्ञान, परंपरा और आधुनिकता के संगम पर महिला शक्ति की निरंतर यात्रा को समझने का एक सशक्त प्रयास है, जहाँ अतीत की विरासत और भविष्य की संभावनाएँ एक साथ दिखाई देती हैं।