• 09-04-2026 06:00 pm to 09-04-2026 09:00 pm
  • आभासीय संगोष्ठी कोलकाता

राहुल सांकृत्यायन का ‘बौद्धिक साहस’ और आज की वैचारिक ध्रुवीकरण की राजनीति

📜 शब्दभूमि प्रकाशन द्वारा दिनांक 09 अप्रैल 2026 (गुरुवार) को सायं 6 बजे, राहुल सांकृत्यायनकी 133वीं जयंती के उपलक्ष्य में एक राष्ट्रीय आभासी संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है, जिसका विषय है -

‘राहुल सांकृत्यायन का बौद्धिक साहसऔर आज की वैचारिक ध्रुवीकरण की राजनीति’

महापंडित राहुल सांकृत्यायन भारतीय ज्ञान परंपरा के उन विरल व्यक्तित्वों में से थे, जिन्होंने अपने समय की जड़ताओं, रूढ़ियों और स्थापित मान्यताओं को चुनौती देते हुए स्वतंत्र और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को अपनाया। उनका जीवन बौद्धिक साहस, जिज्ञासा और वैचारिक स्वतंत्रता का प्रतीक रहा है।

आज के दौर में, जब समाज और राजनीति तेजी से वैचारिक ध्रुवीकरण (Ideological Polarization) की ओर बढ़ रही है, जहाँ संवाद की जगह टकराव और तर्क की जगह पूर्वाग्रह हावी हो रहे हैं; ऐसे समय में सांकृत्यायन का चिंतन हमें यह सोचने के लिए प्रेरित करता है कि:
क्या हम वास्तव में विचार करने की स्वतंत्रता को बचा पा रहे हैं, या हम धीरे-धीरे वैचारिक खाँचों में सीमित होते जा रहे हैं?

यह संगोष्ठी सांकृत्यायन के विचारों के आलोक में वर्तमान समय के इस जटिल प्रश्न की पड़ताल करेगी, जहाँ ज्ञान, असहमति, और बौद्धिक साहस को पुनः स्थापित करने की आवश्यकता है।

🎯 संगोष्ठी के प्रमुख प्रश्न

  • राहुल सांकृत्यायन के जीवन और लेखन में बौद्धिक साहसकी अवधारणा क्या थी?
  • क्या आज का समाज वैचारिक स्वतंत्रता को स्वीकार कर पा रहा है?
  • ध्रुवीकरण के इस दौर में संवाद और सह-अस्तित्व की संभावनाएँ क्या हैं?

🎯 संगोष्ठी के उद्देश्य

  • सांकृत्यायन के विचारों को समकालीन संदर्भ में पुनर्पाठ करना
  • वैचारिक ध्रुवीकरण की प्रवृत्तियों का विश्लेषण करना
  • स्वतंत्र चिंतन और बौद्धिक साहस को प्रोत्साहित करना
  • समाज में संवाद और आलोचनात्मक दृष्टि को पुनर्जीवित करना

🌐 कार्यक्रम विवरण

  • आयोजक: शब्दभूमि प्रकाशन
  • दिनांक: 09 अप्रैल 2026
  • दिन: गुरुवार
  • समय: सायं 6 बजे
  • माध्यम: Zoom (आभासी संगोष्ठी)

यह संगोष्ठी केवल एक जयंती आयोजन नहीं, बल्कि विचार, असहमति और बौद्धिक स्वतंत्रता के पुनर्स्थापन का एक गंभीर प्रयास है, जहाँ प्रश्न पूछना ही सबसे बड़ा साहस बन जाता है।