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20-03-2026 06:00 pm to 20-03-2026 08:00 pm
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आभासीय संगोष्ठी कोलकाता
समकालीन कविता में सामाजिक परिवर्तन की चेतना
शब्दभूमि प्रकाशन द्वारा विश्व कविता दिवस 2026 के अवसर पर एक राष्ट्रीय गोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है, जिसका केंद्रीय विषय है -
‘कायाकल्प (Metamorphosis): कविता के परिवर्तन की यात्रा’
कविता केवल शब्दों का संयोजन नहीं, बल्कि समय, समाज और संवेदनाओं का जीवंत दस्तावेज़ होती है। हर युग में कविता ने अपने रूप, भाषा, शिल्प और सरोकारों में परिवर्तन करते हुए स्वयं को पुनः रचा है। यही निरंतर परिवर्तन यानी कायाकल्प कविता की जीवंतता और प्रासंगिकता का मूल है।
प्राचीन काव्य परंपराओं से लेकर आधुनिक और उत्तर-आधुनिक अभिव्यक्तियों तक, कविता ने न केवल अपने स्वरूप को बदला है, बल्कि समाज की बदलती चेतना, संघर्षों और आकांक्षाओं को भी अभिव्यक्त किया है। आज डिजिटल युग में, जब कविता सोशल मीडिया, मंच और नए माध्यमों के जरिए नई पहचान बना रही है, यह प्रश्न और भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि क्या कविता केवल बदल रही है, या वह अपने मूल स्वरूप को भी पुनर्परिभाषित कर रही है?
यह गोष्ठी कविता के इसी रूपांतरण की बहुआयामी यात्रा को समझने और उस पर संवाद स्थापित करने का एक सशक्त प्रयास है।
🎯 गोष्ठी के प्रमुख बिंदु
• कविता के रूप और शिल्प में ऐतिहासिक परिवर्तन
• भाषा, शैली और अभिव्यक्ति के नए आयाम
• डिजिटल युग में कविता की नई पहचान
• परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन
🎯 गोष्ठी के उद्देश्य
• कविता के विकास और परिवर्तन की प्रक्रिया को समझना
• समकालीन काव्य-प्रवृत्तियों पर गंभीर विमर्श करना
• रचनात्मक अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करना
• साहित्य और समाज के संबंध को नए दृष्टिकोण से देखना
🌐 कार्यक्रम विवरण
• आयोजक: शब्दभूमि प्रकाशन
• दिनांक: 21 अप्रैल 2026
• दिन: शनिवार
• समय: सायं 6 बजे
• माध्यम: Zoom (आभासी संगोष्ठी)
🌐 कौन भाग ले सकते हैं?
कवि, साहित्यकार, शोधार्थी, विद्यार्थी एवं कविता और साहित्य में रुचि रखने वाले सभी व्यक्ति
✨ यह गोष्ठी केवल कविता का उत्सव नहीं, बल्कि कविता के निरंतर परिवर्तन और उसके भीतर छिपी जीवंत चेतना को समझने का एक रचनात्मक प्रयास है जहाँ हर शब्द अपने भीतर एक नई दुनिया रचता है।