"चन्द्रशेखर आज़ाद" प्रसिद्ध बाल एवं ऐतिहासिक साहित्यकार तेजपाल धामा द्वारा लिखित एक प्रेरणादायक जीवनी है, जो भारत के महान क्रांतिकारी शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद के अदम्य साहस, देशभक्ति और बलिदान की गौरवगाथा को सरल एवं रोचक शैली में प्रस्तुत करती है।
यह पुस्तक पाठकों को उस युवा क्रांतिकारी के जीवन से परिचित कराती है, जिसने ब्रिटिश साम्राज्य की दमनकारी नीतियों को चुनौती देते हुए अपना सम्पूर्ण जीवन मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए समर्पित कर दिया। बाल्यावस्था में असहयोग आंदोलन से जुड़ने वाले चन्द्रशेखर तिवारी ने अदालत में अपना नाम "आज़ाद", पिता का नाम "स्वतंत्रता" और निवास "जेलखाना" बताकर अंग्रेजी शासन को चुनौती दी। तभी से वे पूरे देश में चन्द्रशेखर आज़ाद के नाम से अमर हो गए।
पुस्तक में काकोरी कांड, हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) में उनकी भूमिका, भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव जैसे क्रांतिकारियों के साथ उनके संबंध तथा अल्फ्रेड पार्क (प्रयागराज) में अंतिम क्षण तक संघर्ष करते हुए स्वयं को गोली मारकर "आज़ाद" रहने की उनकी प्रतिज्ञा निभाने की मार्मिक कथा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
तेजपाल धामा की सहज भाषा और रोचक शैली इस जीवनी को विशेष रूप से बच्चों, किशोरों और युवाओं के लिए प्रेरणास्पद बनाती है। यह पुस्तक केवल एक क्रांतिकारी का जीवन-वृत्तांत नहीं, बल्कि साहस, आत्मसम्मान और राष्ट्रप्रेम का जीवंत पाठ है। चन्द्रशेखर आज़ाद के जीवन के तथ्य व्यापक रूप से ऐतिहासिक स्रोतों में प्रमाणित हैं।
Neque porro est qui dolorem ipsum quia quaed inventor veritatis et quasi
architecto var sed efficitur turpis gilla sed sit amet finibus eros. Lorem
Ipsum is
simply dummy
Your cart is empty!