CHAR AADIROOP

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₹180

₹225 20% OFF
  • Format: Paper Back
  • Publish Years: 2026
  • Total page: 200
  • Language: HINDI

"चार आदिरूप" (Char Aadiroop) विश्वप्रसिद्ध मनोविश्लेषक और विश्लेषणात्मक मनोविज्ञान (Analytical Psychology) के प्रवर्तक कार्ल गुस्ताव युंग (Carl Gustav Jung) की महत्वपूर्ण कृति "Four Archetypes" का हिंदी अनुवाद है, जिसे प्रगति सक्सेना ने अत्यंत संवेदनशीलता और बौद्धिक स्पष्टता के साथ हिंदी पाठकों के लिए प्रस्तुत किया है। यह पुस्तक मानव-मन की गहराइयों, सामूहिक अचेतन और आदिम प्रतीकों की रहस्यमय दुनिया का द्वार खोलती है।

युंग का मानना था कि मनुष्य का व्यक्तित्व केवल व्यक्तिगत अनुभवों से निर्मित नहीं होता, बल्कि उसके भीतर "सामूहिक अचेतन" (Collective Unconscious) भी सक्रिय रहता है। यह सामूहिक अचेतन मानव सभ्यता के आदिम अनुभवों, मिथकों, प्रतीकों और सार्वभौमिक मनोवैज्ञानिक संरचनाओं का भंडार है। इन्हीं संरचनाओं को युंग ने "आदिरूप" (Archetypes) कहा।

इस पुस्तक में युंग चार प्रमुख आदिरूपों की चर्चा करते हैं—

1. माता (The Mother)

मातृत्व, संरक्षण, पोषण और सृजन का प्रतीक। यह केवल जैविक माँ तक सीमित नहीं, बल्कि प्रकृति, धरती और सुरक्षा प्रदान करने वाली सभी शक्तियों का प्रतिनिधित्व करता है।

2. पुनर्जन्म (Rebirth)

आत्मिक परिवर्तन, नवीकरण और आंतरिक विकास का प्रतीक। मनुष्य के जीवन में संकट और संघर्ष के बाद उत्पन्न होने वाले नए आत्मबोध को युंग पुनर्जन्म की प्रक्रिया से जोड़ते हैं।

3. आत्मा की छवि (The Spirit)

ज्ञान, मार्गदर्शन और उच्च चेतना का आदिरूप। मिथकों और सपनों में यह प्रायः गुरु, ऋषि या ज्ञानी वृद्ध के रूप में प्रकट होता है।

4. छलिया (The Trickster)

मानव स्वभाव के अराजक, हास्यपूर्ण और विद्रोही पक्ष का प्रतिनिधित्व करता है। यह स्थापित नियमों को चुनौती देता है और परिवर्तन की संभावना पैदा करता है।

युंग इन आदिरूपों को मिथकों, धर्मों, स्वप्नों और लोककथाओं के उदाहरणों के माध्यम से समझाते हैं। वे बताते हैं कि आधुनिक मनुष्य की समस्याओं को समझने के लिए उसके अचेतन मन और प्रतीकों की भाषा को समझना आवश्यक है।

साहित्यिक एवं वैचारिक दृष्टि से

"चार आदिरूप" मनोविज्ञान, दर्शन, मिथक-विज्ञान और सांस्कृतिक अध्ययन के संगम पर स्थित एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण कृति है। यह केवल मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों की पुस्तक नहीं, बल्कि मनुष्य की आंतरिक यात्रा को समझने का माध्यम भी है। इसकी भाषा गंभीर होने के बावजूद विचारोत्तेजक है और हिंदी अनुवाद इसे व्यापक पाठक-वर्ग तक पहुँचाने में सफल होता है।

यह पुस्तक विशेष रूप से उन पाठकों के लिए उपयोगी है जो मनोविज्ञान, मिथकीय अध्ययन, दर्शन, स्वप्न-विश्लेषण और आत्म-अन्वेषण में रुचि रखते हैं।

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Leslie Alexander
February 10, 2024 at 2:37 pm

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