"खोये हुए लोगों का शहर" प्रसिद्ध चित्रकार, कला-समीक्षक, संस्कृतिकर्मी और लेखक अशोक भौमिक की अत्यंत आत्मीय और स्मृतिमय कृति है। यह पुस्तक एक साधारण संस्मरण नहीं, बल्कि इलाहाबाद (अब प्रयागराज) के सांस्कृतिक इतिहास का जीवंत आख्यान है। इसमें लेखक ने उस शहर को याद किया है, जिसने उन्हें एक कलाकार, लेखक और संवेदनशील मनुष्य के रूप में गढ़ा।
गंगा और यमुना के संगम का शहर इलाहाबाद कभी शिक्षा, साहित्य, रंगकर्म और बौद्धिक विमर्श का केंद्र माना जाता था। अशोक भौमिक ने इस पुस्तक में उसी इलाहाबाद को पुनर्जीवित किया है—उसकी गलियाँ, कॉफ़ी हाउस, विश्वविद्यालय, थिएटर, कलाकार, कवि, संगीतकार और वे अनगिनत चेहरे, जो समय की धूल में कहीं खो गए, लेकिन लेखक की स्मृतियों में अब भी जीवित हैं।
यह पुस्तक केवल प्रसिद्ध व्यक्तियों के संस्मरणों तक सीमित नहीं है। इसमें ऐसे अनेक अज्ञात और अल्पज्ञात पात्र भी हैं, जिन्होंने लेखक के जीवन को गहराई से प्रभावित किया। कॉफ़ी हाउस में काम करने वाला जेम्स, भूले-बिसरे कवि प्रभात रंजन, रंगकर्मी, कलाकार और साधारण लोग—सभी इस पुस्तक में बराबर आत्मीयता के साथ उपस्थित होते हैं। वे इतिहास के हाशिए पर छूटे हुए लोग हैं, जिनकी वजह से किसी शहर की आत्मा निर्मित होती है।
अशोक भौमिक स्मृतियों को केवल भावुकता के साथ नहीं देखते, बल्कि आलोचनात्मक दृष्टि से भी उनका मूल्यांकन करते हैं। वे इलाहाबाद की सांस्कृतिक ऊँचाइयों के साथ-साथ उसके पतन, अवसरवाद, सामाजिक अंतर्विरोधों और बदलती संवेदनाओं को भी दर्ज करते हैं। इसीलिए यह पुस्तक अतीत का महिमामंडन नहीं, बल्कि समय और समाज की एक ईमानदार पड़ताल बन जाती है।
लेखक की भाषा चित्रकार की तूलिका की तरह काम करती है। वे दृश्य, गंध, ध्वनि और मनःस्थितियों को इतने जीवंत ढंग से उकेरते हैं कि पाठक स्वयं उन गलियों में घूमने लगता है। इस पुस्तक को पढ़ना मानो किसी पुराने शहर की धुंधली तस्वीरों में धीरे-धीरे रंग भरते देखना है।
"खोये हुए लोगों का शहर" संस्मरण, सांस्कृतिक इतिहास और आत्मकथात्मक गद्य का एक अद्भुत संगम है। यह पुस्तक केवल इलाहाबाद की कहानी नहीं, बल्कि उन सभी शहरों की कथा है जो हमारे भीतर बसते हैं और समय बीत जाने के बाद भी हमें छोड़कर नहीं जाते।
यह कृति उन पाठकों के लिए विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है जो संस्मरण साहित्य, सांस्कृतिक अध्ययन, इलाहाबाद की बौद्धिक परंपरा और आत्मीय गद्य में रुचि रखते हैं।
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