"अंजलि भर मिट्टी" संवेदनशील कवि और चिंतक डॉ. सदानंद भोसले का महत्त्वपूर्ण कविता-संग्रह है, जिसमें मनुष्य, समाज, स्मृतियों और मिट्टी से जुड़े भावों को अत्यंत आत्मीयता और गहरी मानवीय दृष्टि के साथ अभिव्यक्त किया गया है।
इस संग्रह की कविताएँ जीवन के साधारण दिखने वाले अनुभवों में छिपे असाधारण अर्थों की तलाश करती हैं। यहाँ मिट्टी केवल धरती का प्रतीक नहीं है, बल्कि जड़ों, संस्कृति, श्रम, रिश्तों, स्मृतियों और मनुष्यता का रूपक बनकर उपस्थित होती है। कवि अपने समय की विसंगतियों, सामाजिक असमानताओं और बदलते मानवीय मूल्यों पर प्रश्न भी उठाता है, साथ ही आशा, करुणा और मनुष्य की आंतरिक शक्ति में विश्वास बनाए रखता है।
डॉ. सदानंद भोसले एक गंभीर अध्यापक, शोधकर्ता, आलोचक और संवेदनशील रचनाकार के रूप में प्रतिष्ठित हैं। उनकी कविताओं में बौद्धिक गहराई और भावनात्मक ऊष्मा का अद्भुत संतुलन दिखाई देता है। यह संग्रह पाठकों को अपने समय और स्वयं से संवाद करने का अवसर प्रदान करता है।
"अंजलि भर मिट्टी" उन पाठकों के लिए एक अनमोल कृति है जो कविता में जीवन की गंध, लोक-संवेदना और मानवीय सरोकारों की तलाश करते हैं।
Your cart is empty!