"कलियुग की पूर्व संध्या" (On the Eve of Kalyug) लेखक एवं कवि Vineet Agarwal की एक विशिष्ट द्विभाषी काव्य-कृति है, जिसमें हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में रचित 153 पद्य (श्लोक/छंद) शामिल हैं। यह कृति महाभारत युद्ध के अंतिम दिवस की घटनाओं का काव्यमय, शोधपरक और निष्पक्ष प्रस्तुतीकरण करती है।
पुस्तक का शीर्षक अत्यंत सार्थक है, क्योंकि महाभारत युद्ध की समाप्ति के साथ ही कलियुग का आरंभ माना जाता है। इसी संक्रमणकालीन क्षण को लेखक ने अपनी काव्य-दृष्टि का केंद्र बनाया है। युद्ध के अंतिम दिन की घटनाएँ, पात्रों की मनःस्थितियाँ, धर्म और अधर्म का द्वंद्व, विजय और विनाश की विडंबना तथा युगांतकारी परिवर्तन की अनुभूति इस कृति में अत्यंत प्रभावशाली ढंग से व्यक्त हुई है।
इस रचना की विशेषता यह है कि यह केवल कल्पना पर आधारित काव्य नहीं है। लेखक ने महाभारत के विभिन्न संस्करणों, संस्कृत साहित्य तथा उपलब्ध ऐतिहासिक-सांस्कृतिक स्रोतों के गहन अध्ययन के आधार पर घटनाओं को काव्यात्मक रूप प्रदान किया है। पुस्तक के प्रारंभ में महाभारत से संबंधित प्रसंगों और पात्रों का संक्षिप्त परिचय भी दिया गया है, जिससे पाठक कथा-प्रवाह को सहजता से समझ सके।
भाषा में प्राचीनता की छाया, महाकाव्यात्मक गरिमा और काव्यात्मक लय का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। लेखक ने महाभारत के पात्रों और घटनाओं को किसी पक्षपात के बिना प्रस्तुत करने का प्रयास किया है, जिससे यह कृति केवल धार्मिक या पौराणिक पाठ न रहकर एक साहित्यिक एवं सांस्कृतिक अनुभव बन जाती है।
"कलियुग की पूर्व संध्या" महाभारत, भारतीय मिथक, इतिहास और काव्य-साहित्य में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए एक अनूठी और संग्रहणीय पुस्तक है। यह कृति पाठक को उस निर्णायक क्षण में ले जाती है जहाँ एक युग समाप्त होता है और दूसरे युग का आरंभ होता है।
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