Apsara By Suryakant Tripathi Nirala

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अप्सरा’: सौंदर्य, संघर्ष और आत्मगौरव की कथा

सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' का उपन्यास अप्सरा उनकी कथा-यात्रा का प्रथम और अत्यंत महत्त्वपूर्ण सोपान है। यह कृति केवल एक प्रेमकथा नहीं, बल्कि सौंदर्य, कला, नारी-स्वातंत्र्य और आत्मसम्मान के जटिल अंतर्संबंधों का मार्मिक आख्यान है।

उपन्यास की नायिका अप्सरा-समान रूपवती होने के साथ-साथ कला-प्रेम में आकंठ डूबी हुई एक सशक्त व्यक्तित्व है। वह अपने सामाजिक और पेशागत परिवेश से एक प्रकार की विरक्ति अनुभव करती हुई अपने हृदय को एक कलाकार के प्रति समर्पित कर देती है। किंतु यह समर्पण उसे सहज मार्ग नहीं देता, बल्कि उसे अनेक सामाजिक षड्यंत्रों, दुष्चक्रों और मानसिक-भावनात्मक संघर्षों से होकर गुजरना पड़ता है।

इन समस्त विपरीत परिस्थितियों के बीच नायिका न केवल अपनी आंतरिक पवित्रता को अक्षुण्ण बनाए रखने में सफल होती है, बल्कि उसकी नारी-सुलभ कोमलता और अदम्य चारित्रिक दृढ़ता दोनों ही समान रूप से प्रकाशित होती हैं। इस प्रकार, ‘अप्सराकी नायिका एक साथ संवेदना और शक्ति की प्रतीक बनकर उभरती है।

उपन्यास में तत्कालीन भारतीय समाज की पृष्ठभूमि अत्यंत सजीवता से अंकित हुई है। विशेषतः स्वाधीनता-चेतना से ओतप्रोत युवा-वर्ग की दृढ़, संघर्षशील और संकल्पित मानसिकता का चित्रण इस कृति को एक व्यापक सामाजिक परिप्रेक्ष्य प्रदान करता है। इस दृष्टि से अप्सरा महाप्राण निराला की सामाजिक प्रतिबद्धता और मानवीय मूल्यों के प्रति उनके गहन आग्रह का ज्वलंत उदाहरण है।

₹225

₹250 10% OFF
  • Format: Paper Back
  • Publish Years: 2026
  • Total page: 150
  • Language: HINDI

अप्सरा हिंदी साहित्य का एक महत्त्वपूर्ण क्लासिक उपन्यास है, जिसमें निराला ने नारी के आंतरिक संसार, उसकी संवेदनशीलता और संघर्षशीलता को अत्यंत प्रभावपूर्ण ढंग से चित्रित किया है। उपन्यास की नायिका सौंदर्य और कला की प्रतीक होते हुए भी केवल बाह्य आकर्षण तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वह अपने निर्णयों, संघर्षों और आत्मबल के माध्यम से एक स्वतंत्र और दृढ़ व्यक्तित्व के रूप में उभरती है।

यह कृति न केवल एक भावनात्मक प्रेमकथा है, बल्कि सामाजिक यथार्थ, नैतिक द्वंद्व और स्वतंत्रता-पूर्व भारत के बदलते परिवेश का भी सजीव दस्तावेज है। निराला की भाषा की काव्यात्मकता और संवेदनात्मक गहराई इस उपन्यास को एक विशिष्ट साहित्यिक ऊँचाई प्रदान करती है।

यह पुस्तक उन पाठकों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है जो हिंदी के क्लासिक साहित्य, नारी-विमर्श और भावनात्मक कथाओं में रुचि रखते हैं।

 

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Leslie Alexander
February 10, 2024 at 2:37 pm

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