दूब-धान समकालीन हिंदी कविता की सशक्त हस्ताक्षर अनामिका का एक महत्वपूर्ण कविता-संग्रह है। इस संग्रह की कविताएँ स्त्री-अनुभव, स्मृति, लोकजीवन, प्रकृति, सामाजिक असमानताओं और मानवीय संवेदनाओं की गहरी पड़ताल करती हैं। अनामिका की काव्य-दृष्टि अपने समय के जटिल प्रश्नों से संवाद करती है और पाठकों को जीवन को अधिक मानवीय तथा संवेदनशील दृष्टि से देखने के लिए प्रेरित करती है।
इस संग्रह में कवयित्री ने स्त्री-जीवन की छोटी-छोटी अनुभूतियों, घरेलू संसार की अनकही आवाज़ों, लोक-संस्कृति की जीवंत छवियों और बदलते सामाजिक परिवेश को अत्यंत कलात्मक भाषा में अभिव्यक्त किया है। उनकी कविताएँ प्रतिरोध और करुणा, स्मृति और स्वप्न, निजी और सार्वजनिक जीवन के बीच एक सेतु का निर्माण करती हैं।
'दूब' की तरह जीवन की जिजीविषा और 'धान' की तरह आशा, उर्वरता और श्रम की महिमा इस संग्रह की मूल संवेदना है। यह पुस्तक पाठकों को केवल कविता का सौन्दर्य ही नहीं देती, बल्कि उन्हें अपने समय, समाज और स्वयं के भीतर झाँकने का अवसर भी प्रदान करती है।
दूब-धान समकालीन हिंदी कविता, स्त्री-विमर्श और लोक-संवेदना में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए एक संग्रहणीय कृति है। इसमें कविता को जीवन और समाज के गहरे अनुभवों से जोड़ने का सशक्त प्रयास दिखाई देता है।
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