"जंजीर तथा अन्य कहानियाँ" ओड़िया साहित्य के प्रतिष्ठित कथाकार और साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित लेखक गौरहरी दास की प्रतिनिधि कहानियों का एक महत्त्वपूर्ण संग्रह है। इन कहानियों में समकालीन समाज की विडंबनाएँ, मानवीय संबंधों की जटिलताएँ और आम आदमी के संघर्षों का अत्यंत संवेदनशील चित्रण मिलता है।
संग्रह की कहानियाँ मनुष्य के भीतर और बाहर मौजूद अनेक प्रकार की "जंजीरों" की पहचान कराती हैं—गरीबी, सामाजिक असमानता, रूढ़ियाँ, भय, सत्ता और मानसिक बंधनों की जंजीरें। लेखक अपने पात्रों के माध्यम से यह दिखाते हैं कि जीवन की कठोर परिस्थितियों में भी मनुष्य उम्मीद, करुणा और आत्मसम्मान को बचाए रखने का प्रयास करता है।
गौरहरी दास की लेखनी की विशेषता उनकी गहरी मानवीय दृष्टि, सामाजिक प्रतिबद्धता और सरल लेकिन प्रभावशाली भाषा है। वे ग्रामीण और शहरी जीवन के विविध अनुभवों को इस तरह प्रस्तुत करते हैं कि पाठक स्वयं उन परिस्थितियों का हिस्सा महसूस करने लगता है। उनकी कहानियाँ केवल घटनाओं का बयान नहीं, बल्कि हमारे समय के नैतिक और सामाजिक प्रश्नों से संवाद भी हैं।
यह संग्रह समकालीन भारतीय कथा-साहित्य, सामाजिक यथार्थ और अनूदित साहित्य में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए एक महत्त्वपूर्ण एवं संग्रहणीय कृति है। लेखक की रचनात्मकता और मानवीय दृष्टि को व्यापक रूप से सराहा गया है।
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