'परिवेश : हम-तुम' ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित कवि कुँवर नारायण का अत्यंत चर्चित और संवेदनशील कविता-संग्रह है। यह संग्रह प्रेम, स्मृति, आत्मसंवाद, मानवीय संबंधों और अस्तित्वगत अनुभवों की सूक्ष्म अभिव्यक्ति प्रस्तुत करता है। पहली बार वर्ष 1961 में प्रकाशित यह कृति नई कविता आंदोलन की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में गिनी जाती है।
इस संग्रह की कविताओं में प्रेम केवल भावुकता नहीं, बल्कि आत्मबोध, नैतिकता और मानवीय गरिमा का विस्तार बनकर उपस्थित होता है। कुँवर नारायण ने 'हम' और 'तुम' के माध्यम से व्यक्ति और समाज, निजी और सार्वभौमिक, निकटता और दूरी के अनेक आयामों की गहरी पड़ताल की है। उनकी भाषा संयमित, सौंदर्यपूर्ण और विचारोत्तेजक है, जो पाठक को आत्मचिंतन की यात्रा पर ले जाती है।
'परिवेश : हम-तुम' प्रेम की कोमल अनुभूतियों, समय की बदलती संवेदनाओं और मनुष्य की आंतरिक दुनिया को समझने का एक अनूठा काव्य-दस्तावेज़ है। समकालीन हिंदी कविता, नई कविता और कुँवर नारायण के साहित्य में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए यह एक संग्रहणीय कृति है।
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