KYA PURAB KYA PASCHIM

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  • Format: Paper Back
  • Publish Years: 2026
  • Total page: 178
  • Language: HINDI

"क्या पूरब क्या पश्चिम" हिन्दी के सुप्रसिद्ध ललित निबंधकार, भाषाविद् और चिंतक पंडित विद्यानिवास मिश्र की एक अत्यंत विचारोत्तेजक कृति है, जिसमें उन्होंने पूर्व और पश्चिम की सांस्कृतिक अवधारणाओं, जीवन-दृष्टियों और मानवीय मूल्यों का गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया है। यह पुस्तक किसी एक सभ्यता की श्रेष्ठता सिद्ध करने का प्रयास नहीं करती, बल्कि दोनों के बीच संवाद, सह-अस्तित्व और परस्पर सीखने की संभावनाओं को रेखांकित करती है।

विद्यानिवास मिश्र का मानना है कि संस्कृति स्थिर नहीं होती, बल्कि निरंतर विकसित होने वाली जीवंत प्रक्रिया है। वे भारतीय परंपरा की जड़ों से जुड़े रहते हुए आधुनिकता और पश्चिमी विचारों का खुले मन से मूल्यांकन करते हैं। इसीलिए उनके निबंध न तो अंधी परंपरावादिता के पक्षधर हैं और न ही अंधानुकरण के।

इस पुस्तक में लेखक ने भारतीयता, लोकचेतना, सांस्कृतिक अस्मिता, भाषा, शिक्षा और आधुनिक जीवन की चुनौतियों जैसे विषयों पर गंभीर चिंतन किया है। उनकी भाषा विद्वत्तापूर्ण होते हुए भी अत्यंत सहज, आत्मीय और काव्यमय है, जो पाठक को विचार और संवेदना की एक अनूठी यात्रा पर ले जाती है।

"क्या पूरब क्या पश्चिम" भारतीय संस्कृति, तुलनात्मक सभ्यता अध्ययन और ललित निबंध साहित्य में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए एक अनिवार्य पठनीय कृति है।

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Leslie Alexander
February 10, 2024 at 2:37 pm

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