MAIN NASTIK KYON HOON

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  • Format: Paper Back
  • Publish Years: 2026
  • Total page: 128
  • Language: HINDI

"मैं नास्तिक क्यों हूँ" भगत सिंह का सर्वाधिक चर्चित और प्रभावशाली वैचारिक निबंध है, जिसे उन्होंने लाहौर सेंट्रल जेल में 1930 के दौरान लिखा था। यह केवल नास्तिकता पर लिखा गया लेख नहीं, बल्कि तर्क, स्वतंत्र चिंतन, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सामाजिक न्याय के पक्ष में प्रस्तुत एक गहन वैचारिक दस्तावेज़ है।

इस निबंध में भगत सिंह ने ईश्वर, धर्म, आस्था और अंधविश्वास से जुड़े प्रश्नों पर तार्किक दृष्टि से विचार किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका नास्तिक होना अहंकार या प्रसिद्धि का परिणाम नहीं, बल्कि अध्ययन, चिंतन और तर्कपूर्ण विश्लेषण का निष्कर्ष था। यह लेख उनके उस बौद्धिक व्यक्तित्व को सामने लाता है, जो एक क्रांतिकारी के साथ-साथ एक गंभीर विचारक भी था।

पुस्तक में भगत सिंह सामाजिक असमानता, शोषण, गरीबी, धार्मिक रूढ़ियों और मानव स्वतंत्रता जैसे विषयों पर भी विचार प्रस्तुत करते हैं। उनका मानना था कि मनुष्य को अंधविश्वास के बजाय विवेक, विज्ञान और मानवीय मूल्यों के आधार पर समाज का निर्माण करना चाहिए।

यह कृति आज भी युवाओं, विद्यार्थियों, शोधार्थियों और सामाजिक-राजनीतिक चिंतन में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए अत्यंत प्रासंगिक है। यह पुस्तक पाठकों को प्रश्न पूछने, तर्क करने और स्वतंत्र रूप से सोचने की प्रेरणा देती है।

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Leslie Alexander
February 10, 2024 at 2:37 pm

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