"बिरजू महाराज: मेरे गुरु, मेरी नज़र में" भारतीय शास्त्रीय नृत्य की महान विभूति पंडित बिरजू महाराज को उनकी प्रमुख शिष्या शाश्वती सेन द्वारा अर्पित एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि है। यह पुस्तक केवल जीवनी नहीं, बल्कि गुरु और शिष्य के बीच के गहरे आत्मीय संबंधों का जीवंत दस्तावेज़ है। शाश्वती सेन ने लगभग 45 वर्षों से अधिक समय तक बिरजू महाराज के सान्निध्य में रहकर उनके व्यक्तित्व, कला और जीवन-दर्शन को निकट से देखा और समझा।
इस पुस्तक में कथक सम्राट पंडित बिरजू महाराज के व्यक्तित्व की अनेक परतें खुलती हैं—उनकी सादगी, विनम्रता, उदारता, हास्यप्रियता, अनुशासन और कला के प्रति समर्पण। विश्वविख्यात नर्तक होने के बावजूद वे एक सहज, सरल और मानवीय व्यक्तित्व थे। लेखिका ने अनेक संस्मरणों, अनुभवों और दुर्लभ प्रसंगों के माध्यम से उनके जीवन के अनछुए पहलुओं को पाठकों के सामने रखा है।
पुस्तक में दुर्लभ छायाचित्रों का भी समावेश है, जो बिरजू महाराज की कलात्मक यात्रा और उनके मानवीय व्यक्तित्व को और अधिक जीवंत बना देते हैं। यह कृति कथक, भारतीय शास्त्रीय नृत्य, संगीत और भारतीय सांस्कृतिक विरासत में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए विशेष रूप से संग्रहणीय है।
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