"बिस्मिल्लाह ख़ान : बनारस के उस्ताद" भारत के महान शहनाई वादक और भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ान के जीवन, संगीत-साधना और सांस्कृतिक विरासत पर आधारित एक अत्यंत महत्वपूर्ण जीवनी है। लेखिका जुही सिन्हा ने इस पुस्तक में केवल एक महान कलाकार की कहानी ही नहीं, बल्कि बनारस की उस जीवंत सांस्कृतिक दुनिया को भी चित्रित किया है, जिसने बिस्मिल्लाह ख़ान जैसे संगीत-सम्राट को जन्म दिया।
यह पुस्तक डुमरांव के एक साधारण बालक से विश्वविख्यात शहनाई-वादक बनने तक की उनकी प्रेरक यात्रा का विस्तार से वर्णन करती है। लेखक ने उनके बचपन, संगीत-प्रशिक्षण, संघर्ष, बनारस से उनके गहरे लगाव और अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त करने तक के सफर को रोचक शैली में प्रस्तुत किया है।
पुस्तक की विशेषता यह है कि इसमें बनारस की गलियों, घाटों, मंदिरों, संगीत-महफिलों और वहाँ के सांस्कृतिक परिवेश का भी जीवंत चित्रण मिलता है। बिस्मिल्लाह ख़ान की असाधारण प्रतिभा, उनकी सादगी, हाजिरजवाबी, मानवीय संवेदनाएँ और संगीत के प्रति समर्पण इस कृति को विशेष बनाते हैं।
यह पुस्तक संगीत-प्रेमियों, जीवनी साहित्य के पाठकों, भारतीय संस्कृति के अध्येताओं और शास्त्रीय संगीत में रुचि रखने वाले सभी पाठकों के लिए संग्रहणीय है।
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