"बाघ के साथ मेरी मुठभेड़" एक रोमांचक, साहसिक और वास्तविक घटनाओं पर आधारित संस्मरणात्मक कृति है, जिसमें राजस्थान के प्रसिद्ध रणथम्भौर टाइगर रिजर्व में लगभग 37 वर्षों तक सेवाएँ देने वाले वन अधिकारी दौलत सिंह शक्तावत ने अपने जीवन के सबसे चुनौतीपूर्ण अनुभवों को पाठकों के सामने रखा है।
इस पुस्तक का सबसे रोमांचकारी प्रसंग वर्ष 2010 का है, जब एक आक्रामक बाघ को बेहोश करने के अभियान के दौरान लेखक स्वयं उसके हमले का शिकार हो गए। यह घटना उनके लिए मृत्यु के बेहद करीब पहुँच जाने वाला अनुभव थी। किंतु इसी अनुभव ने उन्हें बाघों के व्यवहार, जंगल की जटिलताओं और वन्यजीव संरक्षण के महत्व को और गहराई से समझने का अवसर दिया।
पुस्तक में केवल इस मुठभेड़ का ही नहीं, बल्कि रणथम्भौर के जंगलों से जुड़ी कई अद्भुत और सच्ची घटनाओं का भी वर्णन है—जैसे रहस्यमयी तेंदुओं के हमले, लापता बाघों की खोज, अनाथ शावकों की देखभाल, मानव-वन्यजीव संघर्ष की चुनौतियाँ और उन अनाम वनकर्मियों का साहस, जिन्होंने वन्यजीवों की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।
दुर्लभ फोटोग्राफ़ों से सुसज्जित यह पुस्तक पाठकों को जंगल की रोमांचकारी दुनिया में ले जाती है और यह समझाती है कि वन्यजीव संरक्षण केवल सरकारी दायित्व नहीं, बल्कि हमारी सामूहिक जिम्मेदारी भी है। यह पुस्तक वन्यजीव प्रेमियों, प्रकृति-प्रेमियों, छात्रों और रोमांचक वास्तविक कथाओं के पाठकों के लिए एक संग्रहणीय कृति है।
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