"बहता पानी निर्मला" राजस्थान की लोक-संस्कृति, जनजीवन और लोककथाओं की समृद्ध परंपरा को समेटने वाली एक महत्त्वपूर्ण कृति है। प्रख्यात लेखक भागीरथ कनोडिया ने इस पुस्तक में लोकजीवन की सहजता, मानवीय संवेदनाओं और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को अत्यंत आत्मीय और प्रभावशाली शैली में प्रस्तुत किया है।
यह पुस्तक केवल लोककथाओं का संग्रह नहीं, बल्कि राजस्थान की सामाजिक चेतना, लोकविश्वासों, रीति-रिवाजों और जीवन-दर्शन का जीवंत दस्तावेज़ है। शीर्षक "बहता पानी निर्मला" इस विचार का प्रतीक है कि जीवन निरंतर प्रवाहमान है और उसकी पवित्रता उसकी गतिशीलता में निहित है। लेखक ने लोककथाओं के माध्यम से प्रेम, त्याग, करुणा, नैतिकता, साहस और मानवीय संबंधों के विविध आयामों को उजागर किया है।
भागीरथ कनोडिया की भाषा सरल, रोचक और लोक-सुगंध से परिपूर्ण है। उनकी कथाएँ पाठकों को राजस्थान के ग्रामीण परिवेश, लोक-मानस और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ती हैं। यह पुस्तक लोकसाहित्य के शोधार्थियों, भारतीय संस्कृति के अध्येताओं तथा लोककथा-प्रेमी पाठकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है।
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