"दशरथ नंदन श्रीराम" भारत के महान चिंतक, स्वतंत्रता सेनानी और भारत रत्न से सम्मानित विद्वान चक्रवर्ती राजगोपालाचारी (राजाजी) द्वारा रचित रामकथा का सरल, प्रेरक और सरस पुनर्कथन है। यह पुस्तक वाल्मीकि रामायण की मूल भावधारा को सहज हिन्दी में प्रस्तुत करती है, जिससे सामान्य पाठक भी भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन को आसानी से समझ सके।
इस पुस्तक में अयोध्या में श्रीराम के जन्म, उनके बाल्यकाल, विश्वामित्र के साथ वनगमन, सीता स्वयंवर, वनवास, सीता-हरण, हनुमान की अद्भुत भक्ति, लंका विजय और रामराज्य की स्थापना तक की घटनाओं का अत्यंत रोचक एवं प्रभावशाली वर्णन किया गया है।
राजगोपालाचारी ने श्रीराम को केवल एक दिव्य अवतार के रूप में नहीं, बल्कि आदर्श पुत्र, आदर्श भाई, आदर्श पति, आदर्श मित्र और आदर्श शासक के रूप में प्रस्तुत किया है। उनकी भाषा सरल, प्रवाहपूर्ण और भावपूर्ण है, जो बच्चों, युवाओं और सामान्य पाठकों सभी को आकर्षित करती है।
यह पुस्तक भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और धर्मपरायण जीवन की प्रेरणा देने वाली एक अमूल्य कृति है। राजाजी की रामायण विश्वभर में लाखों पाठकों द्वारा पढ़ी गई और इसे उनकी महान साहित्यिक उपलब्धियों में गिना जाता है।
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