"हमारी परंपरा" भारतीय संस्कृति, दर्शन और सभ्यता की अनवरत प्रवाहित होने वाली उस महान धारा का परिचय कराने वाली एक महत्त्वपूर्ण कृति है, जिसका संपादन प्रसिद्ध साहित्यकार वियोगी हरि ने किया है। यह पुस्तक भारतीय परंपरा के विविध आयामों को समग्रता में प्रस्तुत करती है और बताती है कि सदियों के उतार-चढ़ाव, विदेशी आक्रमणों और सामाजिक परिवर्तनों के बावजूद भारत की सांस्कृतिक चेतना किस प्रकार अक्षुण्ण बनी रही।
इस पुस्तक में पूर्ववैदिक काल से लेकर वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत, बौद्ध और जैन परंपराओं, भक्ति आंदोलन, ब्रह्म समाज, आर्य समाज तथा आधुनिक नवजागरण तक भारतीय जीवन-दृष्टि के विभिन्न सूत्रों को एक साथ पिरोया गया है। साथ ही, चार्वाक, सांख्य, योग, वेदान्त, शाक्त और जैन दर्शन जैसी विविध दार्शनिक परंपराओं का भी सारगर्भित परिचय दिया गया है।
वियोगी हरि ने भारतीय संस्कृति को किसी एक मत, पंथ या विचारधारा तक सीमित न मानकर उसे एक विशाल "परंपरा-सागर" के रूप में प्रस्तुत किया है, जिसमें अनेक विचारधाराएँ, आस्थाएँ और जीवन-दर्शन मिलकर एक व्यापक सांस्कृतिक एकता का निर्माण करते हैं।
"हमारी परंपरा" भारतीय संस्कृति, इतिहास, धर्म-दर्शन और सभ्यता अध्ययन में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों, शोधार्थियों तथा सामान्य पाठकों के लिए एक अत्यंत उपयोगी और संग्रहणीय ग्रंथ है।
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