"कैलाश मानसरोवर: हिमालय से आगे की खोज" केवल एक यात्रा-वृत्तांत नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास, मिथक और हिमालयी अन्वेषण की एक अद्भुत यात्रा है। वरिष्ठ राजनयिक, हिमालय-प्रेमी और खोजी यात्री देव मुखर्जी ने इस पुस्तक में कैलाश-मानसरोवर क्षेत्र की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्ता को गहन शोध और अपने प्रत्यक्ष अनुभवों के माध्यम से प्रस्तुत किया है।
अनादिकाल से कैलाश मानसरोवर भारत, नेपाल और तिब्बत के लोगों की आस्था का केंद्र रहा है। हिन्दू धर्म में इसे भगवान शिव और माता पार्वती का निवास, बौद्ध धर्म में कांग रिनपोचे, बोन परंपरा में तिसे, तथा जैन धर्म में अष्टपद के रूप में पूजा जाता है। यह पुस्तक इन विविध धार्मिक मान्यताओं और उनसे जुड़े मिथकों को तथ्यात्मक दृष्टि से समझाती है।
देव मुखर्जी ने 21 वर्षों के अंतराल में की गई अपनी तीन यात्राओं के अनुभवों को विस्तार से साझा किया है। इनमें 1981 में लिपुलेख दर्रे के माध्यम से भारतीय तीर्थयात्रियों के पहले दल का नेतृत्व करने से लेकर तिब्बती पठार की कठिन यात्राओं तक का रोमांचक विवरण शामिल है। पुस्तक में लगभग 200 दुर्लभ रंगीन चित्र भी संकलित हैं, जो पाठकों को कैलाश-मानसरोवर की अलौकिक सुंदरता का सजीव अनुभव कराते हैं।
यह कृति यात्रा-साहित्य, धार्मिक अध्ययन, हिमालयी संस्कृति और भारतीय आध्यात्मिक विरासत में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए एक संग्रहणीय ग्रंथ है।
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