"लता मंगेशकर: अपने खुद के शब्दों में" भारत की स्वर कोकिला लता मंगेशकर के जीवन, संघर्ष, संगीत-साधना और विचारों को उनके अपने शब्दों में प्रस्तुत करने वाली एक अद्वितीय जीवनीपरक कृति है। प्रसिद्ध लेखिका और फिल्म इतिहासकार नसरीन मुन्नी कबीर ने लता जी के साथ हुई विस्तृत बातचीत के आधार पर इस पुस्तक को तैयार किया है, जिससे पाठकों को उनके व्यक्तित्व का एक अंतरंग और प्रामाणिक परिचय प्राप्त होता है।
यह पुस्तक लता मंगेशकर के बचपन, उनके पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर से मिले संगीत संस्कार, शुरुआती संघर्षों, फिल्म संगीत की दुनिया में स्थापित होने की यात्रा और भारतीय सिनेमा के स्वर्णिम दौर की अनेक अनसुनी कहानियों को उजागर करती है। लता जी अपने संगीतकारों, गीतकारों, सहगायकों और अपने जीवन के महत्वपूर्ण अनुभवों को अत्यंत सहजता और ईमानदारी से साझा करती हैं।
लगभग छह दशकों से अधिक लंबे संगीत सफर में लता मंगेशकर ने हजारों गीतों को अपनी अमर आवाज़ दी। वर्ष 2001 में उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया। इस पुस्तक में उनकी विनम्रता, अनुशासन, समर्पण और संगीत के प्रति उनकी निष्ठा का प्रेरक चित्रण मिलता है।
"लता मंगेशकर: अपने खुद के शब्दों में" केवल एक जीवनी नहीं, बल्कि भारतीय फिल्म संगीत के इतिहास, एक युग की सांस्कृतिक स्मृतियों और एक महान कलाकार की आत्मीय यात्रा का दस्तावेज़ है। संगीत-प्रेमियों, शोधार्थियों और भारतीय सिनेमा के पाठकों के लिए यह एक संग्रहणीय पुस्तक है.
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