"तुम्हारी औकात क्या है, पीयूष मिश्रा" प्रसिद्ध अभिनेता, गीतकार, संगीतकार, नाटककार और लेखक Piyush Mishra की बहुचर्चित आत्मकथात्मक कृति है। यह केवल एक आत्मकथा नहीं, बल्कि एक कलाकार के भीतर चलने वाले संघर्ष, भय, प्रेम, असफलताओं, विद्रोह और आत्म-खोज की गहन यात्रा है।
इस पुस्तक का नायक हैमलेट उर्फ़ संताप त्रिवेदी उर्फ़ पीयूष मिश्रा है। ग्वालियर के एक मध्यवर्गीय परिवार से निकलकर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD), दिल्ली के रंगमंच और फिर मुंबई की फिल्मी दुनिया तक पहुँचने की यात्रा को लेखक ने बेहद ईमानदारी और बेबाकी से प्रस्तुत किया है। यह एक ऐसे कलाकार की कहानी है जो लगातार स्वयं से जूझता है और अपनी पहचान की तलाश में भटकता रहता है।
पुस्तक का सबसे प्रभावशाली पक्ष इसकी आत्मस्वीकृति है। पीयूष मिश्रा अपने डर, कमजोरियों, असफल प्रेम, नशे, अहंकार, अकेलेपन और आत्मविनाशकारी प्रवृत्तियों को बिना किसी आडंबर के पाठकों के सामने रखते हैं। यही ईमानदारी इस आत्मकथा को विशिष्ट बनाती है।
साहित्यिक दृष्टि से यह कृति आत्मकथा और उपन्यास के बीच की एक रोचक विधा है। इसमें स्मृतियाँ, आत्मविश्लेषण, नाटकीयता, कविता और कथा का अद्भुत मेल दिखाई देता है। लेखक की भाषा तीखी, भावनात्मक, रंगमंचीय और अत्यंत जीवंत है। पुस्तक केवल घटनाओं का विवरण नहीं देती, बल्कि एक रचनात्मक मन की आंतरिक उथल-पुथल को भी अभिव्यक्त करती है।
"तुम्हारी औकात क्या है, पीयूष मिश्रा" उन पाठकों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो रंगमंच, सिनेमा, आत्मकथा, रचनात्मक लेखन और एक कलाकार के अंतर्द्वंद्व को समझना चाहते हैं। यह पुस्तक बार-बार यह प्रश्न उठाती है—"आख़िर हम हैं कौन, और हमारी वास्तविक औकात क्या है?"
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