"मोहम्मद रफ़ी : स्वयं ईश्वर की आवाज़" भारतीय सिनेमा के महान पार्श्वगायक मोहम्मद रफ़ी के जीवन, संघर्ष, संगीत-साधना और अमर विरासत पर आधारित एक विस्तृत एवं शोधपरक जीवनी है। यह पुस्तक रफ़ी साहब की उस असाधारण यात्रा का दस्तावेज़ है, जिसने उन्हें भारतीय संगीत इतिहास के सबसे प्रिय और सम्मानित गायकों में स्थान दिलाया।
लेखक राजू कोरटी और धीरेंद्र जैन ने गहन शोध के आधार पर रफ़ी साहब के जीवन के विभिन्न पहलुओं को प्रस्तुत किया है। पुस्तक में उनके बचपन, संगीत प्रशिक्षण, मुंबई आगमन, फ़िल्मी दुनिया में संघर्ष, लोकप्रियता के शिखर तक पहुँचने और उनके मानवीय व्यक्तित्व का विस्तार से वर्णन किया गया है।
इस पुस्तक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें रफ़ी साहब द्वारा गाए गए लगभग 7000 गीतों की संगीत-यात्रा और उनसे जुड़े अनेक रोचक प्रसंगों को समाहित किया गया है। पुस्तक केवल जीवनी नहीं, बल्कि भारतीय फ़िल्म संगीत के स्वर्णिम युग का भी इतिहास प्रस्तुत करती है।
रफ़ी साहब की विनम्रता, सादगी, उदारता और संगीत के प्रति समर्पण ने उन्हें केवल महान गायक ही नहीं, बल्कि महान इंसान भी बनाया। यही कारण है कि उनके निधन के दशकों बाद भी उनकी लोकप्रियता अक्षुण्ण बनी हुई है।
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