Tana-Bana By Manju Madhukar

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ताना-बाना’: स्त्री-अनुभवों की बहुरंगी संवेदनात्मक बुनावट

ताना-बाना कथा-संग्रह अपनी विविध विषयवस्तु के बावजूद मूलतः स्त्री-केन्द्रित अनुभवों का एक सघन और बहुआयामी दस्तावेज है। इसमें उच्च-मध्यमवर्गीय स्त्रियों के जीवन की भावनात्मक जटिलताएँ, सामाजिक दबाव, अंतर्द्वंद्व और उनकी सूक्ष्म आकांक्षाएँ अत्यंत संवेदनशीलता के साथ उभरकर सामने आती हैं।

संग्रह की शीर्षक-कथा ताना-बाना एक शिक्षित, सुसंस्कृत, अभिजात्य परिवेश की गृहलक्ष्मी के जीवन की उन महीन परतों को उद्घाटित करती है, जो बाह्य सुसज्जा के भीतर छिपी हुई अनकही उलझनों और त्यागों से निर्मित हैं। वहीं चन्न चणे ते पानी पीना एक तीक्ष्ण व्यंग्य के माध्यम से सामाजिक विडंबनाओं को उजागर करती है।

कर्मणा वाधिका रस्ते में एक ऐसी युवती की कथा है, जो एक मंदबुद्धि पति के साथ जीवन-यापन करते हुए भी अपने कर्म, स्वाभिमान और कर्तव्यनिष्ठा को जीवन का मूलाधार बनाए रखती है। यह कहानी स्त्री की आंतरिक शक्ति और आत्मनिर्भरता का प्रेरक आख्यान बन जाती है।

शाप-मुक्त की नायिका, जो अपने पिता के स्नेह में पली-बढ़ी है, विवाहोपरांत अपनी असलियत उजागर होने पर उपेक्षा का दंश सहती है। किंतु कहानी का अंत पाठक को इस प्रश्न से रूबरू कराता है कि वास्तव में शाप-मुक्तकौन हुआ नायिका या वह समाज, जो अपने पूर्वाग्रहों से मुक्त होने की प्रक्रिया में है।

टिकुली प्रेम, पहचान और सांस्कृतिक टकराव की मार्मिक कथा है, जहाँ एक हिंदू डॉक्टर युवती अपने मुस्लिम सहपाठी से विवाह करती है। प्रारंभ में उसकी टिकुलीसे आकर्षित होने वाला पति, समय के साथ उसी प्रतीक से वितृष्णा अनुभव करने लगता है, यह परिवर्तन आधुनिकता और परंपरा के बीच अंतर्निहित द्वंद्व को उजागर करता है।

त्रिनेत्र को चुनौती और उतरन जैसी कहानियाँ हास्य और विनोद के माध्यम से जीवन की विसंगतियों को हल्के-फुल्के अंदाज़ में प्रस्तुत करती हैं, जबकि नैहर का नेह अपनी सरलता में ही गहन मार्मिकता समेटे हुए है। किलकारी अंतर्मन की सहज, निश्छल और कोमल भावनाओं की एक मधुर अभिव्यक्ति है।

समग्रतः ताना-बाना स्त्री-जीवन की उन अनगिनत अनुभूतियों का कलात्मक ताना-बाना है, जो छोटी-छोटी घटनाओं और प्रसंगों के माध्यम से बड़े सामाजिक और मानवीय प्रश्नों को उद्घाटित करता है।

₹320

₹399 20% OFF
  • Format: Paper Back
  • Publish Years: 2026
  • Total page: 140
  • Language: HINDI

ताना-बाना एक ऐसा कथा-संग्रह है, जो स्त्री-जीवन के बहुआयामी अनुभवों को अत्यंत सूक्ष्मता और कलात्मकता के साथ प्रस्तुत करता है। इसमें शामिल कहानियाँ विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक संदर्भों को छूते हुए स्त्री की भूमिका, उसकी चुनौतियों और उसके अंतर्मन की जटिलताओं को उजागर करती हैं।

संग्रह की विशेषता यह है कि इसमें कथ्य की गंभीरता के साथ-साथ भाषा की सरलता और प्रवाह बना रहता है, जिससे पाठक सहज रूप से इन कहानियों से जुड़ पाता है। हास्य, व्यंग्य, करुणा और संवेदना सभी तत्वों का संतुलित समावेश इसे एक समृद्ध और पठनीय कृति बनाता है।

यह पुस्तक विशेष रूप से उन पाठकों के लिए उपयुक्त है, जो स्त्री-विमर्श, सामाजिक यथार्थ और मानवीय संबंधों की गहराइयों को साहित्य के माध्यम से समझना चाहते हैं।

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Leslie Alexander
February 10, 2024 at 2:37 pm

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