"अनुवाद के व्यावहारिक आयाम" अनुवाद अध्ययन के क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण अकादमिक कृति है, जिसमें अनुवाद के सैद्धांतिक पक्षों के साथ-साथ उसके व्यावहारिक स्वरूप, चुनौतियों और अनुप्रयोगों का विस्तृत विवेचन किया गया है। यह पुस्तक विशेष रूप से उन विद्यार्थियों, शोधार्थियों और अनुवादकों के लिए उपयोगी है जो अनुवाद को केवल भाषा-परिवर्तन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और वैचारिक संप्रेषण की प्रक्रिया के रूप में समझना चाहते हैं।
लेखिका प्रमीला के. पी. ने पुस्तक में अनुवाद की मूल अवधारणाओं, स्रोत भाषा और लक्ष्य भाषा के संबंध, अनुवाद की समस्याओं, तकनीकों तथा विभिन्न प्रकार के अनुवादों का सरल एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया है। पुस्तक यह स्पष्ट करती है कि एक सफल अनुवाद के लिए भाषाई दक्षता के साथ-साथ सांस्कृतिक संदर्भों और विषयगत समझ का होना भी आवश्यक है।
इस पुस्तक में साहित्यिक, प्रशासनिक, तकनीकी, मीडिया तथा शैक्षिक अनुवाद के व्यावहारिक पक्षों पर विशेष बल दिया गया है। साथ ही अनुवाद की गुणवत्ता, मूल्यांकन के मानदंड और आधुनिक समय में अनुवाद की बढ़ती उपयोगिता पर भी प्रकाश डाला गया है।
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