"पर्यटन विकास एवं प्रभाव" पर्यटन अध्ययन के विद्यार्थियों, शोधार्थियों और पर्यटन उद्योग से जुड़े पाठकों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ है। लेखक के. एस. डोरियाल ने इस पुस्तक में पर्यटन के विकास, उसके सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक तथा पर्यावरणीय प्रभावों का विस्तृत और विश्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया है।
पुस्तक में पर्यटन की अवधारणा, इतिहास, स्वरूप, पर्यटन संसाधन, पर्यटन नियोजन, पर्यटन उद्योग की संरचना तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर्यटन के महत्व को सरल भाषा में समझाया गया है। लेखक ने यह स्पष्ट किया है कि पर्यटन केवल मनोरंजन या यात्रा का माध्यम नहीं, बल्कि रोजगार सृजन, क्षेत्रीय विकास, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और आर्थिक प्रगति का एक महत्वपूर्ण साधन भी है।
इस पुस्तक की विशेषता यह है कि इसमें पर्यटन के सकारात्मक प्रभावों के साथ-साथ पर्यावरण प्रदूषण, सांस्कृतिक परिवर्तन, संसाधनों पर दबाव और स्थानीय समुदायों पर पड़ने वाले प्रभावों की भी चर्चा की गई है। इसलिए यह पुस्तक पर्यटन के बहुआयामी स्वरूप को समझने के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होती है।
पर्यटन एवं आतिथ्य प्रबंधन (Tourism & Hospitality Management), भूगोल, समाजशास्त्र तथा विकास अध्ययन के विद्यार्थियों के लिए यह एक उपयोगी पाठ्य एवं संदर्भ पुस्तक है।
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