"अपना अतीत" हिन्दी के सुप्रसिद्ध कथाकार और उपन्यासकार यादवेंद्र शर्मा 'चंद्र' की एक आत्मपरक एवं संवेदनशील कृति है, जिसमें लेखक ने स्मृतियों, अनुभवों और जीवन के विभिन्न पड़ावों को अत्यंत आत्मीयता के साथ अभिव्यक्त किया है। यह पुस्तक व्यक्ति और समय के संबंधों की पड़ताल करती हुई पाठक को अतीत की उन गलियों में ले जाती है, जहाँ जीवन के संघर्ष, रिश्तों की ऊष्मा और बदलते सामाजिक परिवेश की झलक एक साथ दिखाई देती है।
इस कृति में लेखक अपने व्यक्तिगत अनुभवों के माध्यम से उस युग की सामाजिक, सांस्कृतिक और मानवीय परिस्थितियों को चित्रित करते हैं। बचपन की स्मृतियाँ, पारिवारिक संस्कार, जीवन के उतार-चढ़ाव और साहित्यिक यात्रा के अनेक प्रसंग पाठकों के सामने सहजता से खुलते हैं। लेखक की दृष्टि केवल आत्मकथात्मक नहीं है, बल्कि वे अपने समय की सामूहिक चेतना और सामाजिक परिवर्तनों को भी दर्ज करते चलते हैं।
यादवेंद्र शर्मा 'चंद्र' की भाषा सरल, प्रवाहपूर्ण और भावनात्मक गहराई से भरपूर है। वे छोटी-छोटी घटनाओं के माध्यम से जीवन के बड़े सत्य उजागर करते हैं। यही कारण है कि "अपना अतीत" केवल संस्मरण नहीं, बल्कि स्मृति, आत्ममंथन और समय-साक्ष्य का एक महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ बन जाती है।
यह पुस्तक आत्मकथा, संस्मरण और कथेतर साहित्य में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए विशेष रूप से पठनीय और संग्रहणीय है।
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