"अच्छा आदमी" समकालीन हिंदी कथा-साहित्य के महत्वपूर्ण कथाकार Pankaj Mitra का चर्चित कहानी-संग्रह है। इस संग्रह में शामिल कहानियाँ हमारे समय के बदलते सामाजिक यथार्थ, मानवीय संबंधों, छोटे शहरों और कस्बों के जीवन, सत्ता-संरचनाओं तथा आम आदमी के संघर्षों को अत्यंत संवेदनशीलता और व्यंग्यात्मक दृष्टि के साथ प्रस्तुत करती हैं।
पंकज मित्र की कहानियों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे जीवन के साधारण दिखने वाले प्रसंगों में छिपे असाधारण यथार्थ को उजागर करती हैं। "अच्छा आदमी" संग्रह का केंद्रीय प्रश्न यह है कि आज के प्रतिस्पर्धी, उपभोक्तावादी और मूल्य-संकट से ग्रस्त समाज में वास्तव में "अच्छा आदमी" कौन है और उसकी पहचान क्या है। लेखक इस प्रश्न को किसी उपदेशात्मक निष्कर्ष तक नहीं ले जाते, बल्कि विभिन्न पात्रों और परिस्थितियों के माध्यम से पाठक के सामने विचार के लिए छोड़ देते हैं।
संग्रह की कहानियों में ग्रामीण और कस्बाई जीवन की गंध, लोकभाषा की सहजता तथा समकालीन भारतीय समाज की जटिलताएँ समान रूप से उपस्थित हैं। लेखक अपने पात्रों के सुख-दुख, आकांक्षाओं, विडंबनाओं और संघर्षों को इतनी प्रामाणिकता से चित्रित करते हैं कि वे पाठक के अपने परिचित लगने लगते हैं।
भाषा सरल, प्रवाहपूर्ण और संवादधर्मी है। व्यंग्य, करुणा और यथार्थ का संतुलित संयोजन इस संग्रह को विशेष बनाता है। पंकज मित्र का कथा-लेखन सामाजिक सरोकारों से गहराई से जुड़ा हुआ है और उनकी कहानियाँ पाठक को अपने समय और समाज के बारे में गंभीरता से सोचने के लिए प्रेरित करती हैं।
"अच्छा आदमी" समकालीन हिंदी कहानी की उन उल्लेखनीय कृतियों में से है, जो मनुष्य, समाज और समय के अंतर्संबंधों को संवेदनशील तथा कलात्मक ढंग से अभिव्यक्त करती हैं।
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