BHOLARAM KA JEEV

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  • Format: Paper Back
  • Publish Years: 2026
  • Total page: 160
  • Language: HINDI

"भोलाराम का जीव" हिंदी के महान व्यंग्यकार Harishankar Parsai की सर्वाधिक चर्चित और कालजयी व्यंग्य-कथाओं में से एक है। यह रचना भारतीय नौकरशाही, भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और सरकारी तंत्र की संवेदनहीनता पर तीखा व्यंग्य करती है। अपनी अनूठी कल्पना, हास्य और सामाजिक यथार्थ के कारण यह कहानी हिंदी व्यंग्य साहित्य की अमूल्य धरोहर मानी जाती है।

कहानी का केंद्र एक साधारण सेवानिवृत्त कर्मचारी भोलाराम है, जिसे पाँच वर्षों तक पेंशन नहीं मिलती। दफ्तरों के चक्कर लगाते-लगाते वह गरीबी और अभाव में मर जाता है। मृत्यु के बाद भी उसका "जीव" (आत्मा) यमलोक नहीं पहुँचता, क्योंकि वह अपनी पेंशन की फाइलों और दरख्वास्तों में अटका रहता है। यही कल्पनात्मक स्थिति कहानी को अत्यंत रोचक और व्यंग्यपूर्ण बना देती है।

परसाई ने पौराणिक पात्रों—धर्मराज, चित्रगुप्त, यमदूत और नारद—का प्रयोग करके आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्था की विसंगतियों को उजागर किया है। कहानी में दिखाया गया है कि किस प्रकार बिना "वजन" (रिश्वत) के कोई फाइल आगे नहीं बढ़ती और एक सामान्य नागरिक अपने ही अधिकारों के लिए संघर्ष करता रह जाता है।

साहित्यिक दृष्टि से यह कहानी व्यंग्य, हास्य और करुणा का अद्भुत संगम है। लेखक ने आम आदमी की बेबसी, सरकारी तंत्र की जड़ता और सामाजिक भ्रष्टाचार पर ऐसी मार्मिक चोट की है कि पाठक हँसते-हँसते व्यवस्था की भयावह सच्चाई से परिचित हो जाता है।

"भोलाराम का जीव" केवल एक व्यंग्य-कथा नहीं, बल्कि उस आम भारतीय नागरिक की त्रासदी का दस्तावेज़ है, जो अपने अधिकारों के लिए जीवनभर संघर्ष करता है। आज भी यह रचना उतनी ही प्रासंगिक है जितनी अपने समय में थी। 

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