"एक कौड़ी दिल से" हिन्दी के प्रख्यात कथाकार स्वयं प्रकाश का एक सशक्त कहानी-संग्रह है, जिसमें मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक विडंबनाओं और बदलते समय के यथार्थ को अत्यंत आत्मीयता और व्यंग्यात्मक तीक्ष्णता के साथ प्रस्तुत किया गया है। स्वयं प्रकाश समकालीन हिन्दी कहानी के उन महत्त्वपूर्ण रचनाकारों में हैं, जिनकी कहानियाँ आम आदमी के जीवन-संघर्षों और उसके छोटे-छोटे सुख-दुःखों को साहित्यिक गरिमा प्रदान करती हैं।
इस संग्रह की कहानियाँ हमारे आसपास के जीवन से जन्म लेती हैं। इनमें मध्यवर्गीय जीवन की जटिलताएँ, टूटते रिश्ते, बाज़ारवाद का प्रभाव, सामाजिक असमानता और मनुष्य के भीतर बची हुई करुणा के अनेक रंग दिखाई देते हैं। शीर्षक "एक कौड़ी दिल से" इस बात का प्रतीक है कि भावनाओं और मानवीय रिश्तों का मूल्य धन से नहीं आँका जा सकता; कभी-कभी दिल से दिया गया एक छोटा-सा स्नेह भी अनमोल होता है।
स्वयं प्रकाश की भाषा सहज, संवादधर्मी और प्रभावशाली है। वे तीखे सामाजिक प्रश्नों को बिना उपदेशात्मक हुए पाठकों के सामने रखते हैं। उनकी कहानियाँ हँसी और पीड़ा, व्यंग्य और करुणा, आशा और विडंबना के बीच संतुलन बनाते हुए पाठकों को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती हैं।
"एक कौड़ी दिल से" समकालीन हिन्दी कहानी-साहित्य, सामाजिक यथार्थ और मानवीय मूल्यों में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए एक संग्रहणीय और विचारोत्तेजक कृति है।
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