"मंदिर गाँव किनारे" सुप्रसिद्ध कथाकार एवं साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित लेखक गोविन्द मिश्र का एक संवेदनशील कहानी-संग्रह है, जिसमें भारतीय गाँवों के बदलते सामाजिक यथार्थ, मानवीय संबंधों की ऊष्मा और जीवन की सूक्ष्म विडंबनाओं का अत्यंत आत्मीय चित्रण किया गया है।
इस संग्रह की कहानियाँ गाँव के उस संसार को हमारे सामने प्रस्तुत करती हैं, जहाँ परंपरा और आधुनिकता का द्वंद्व लगातार उपस्थित है। गाँव का मंदिर केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक जीवन, रिश्तों, विश्वासों और सामूहिक स्मृतियों का प्रतीक बनकर उभरता है। लेखक अपने विशिष्ट कथा-शिल्प के माध्यम से ग्रामीण जीवन के छोटे-छोटे प्रसंगों को व्यापक मानवीय अर्थ प्रदान करते हैं।
गोविन्द मिश्र की कहानियों की सबसे बड़ी विशेषता उनकी सहज भाषा, गहरी मानवीय संवेदना और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टि है। वे बिना किसी शोर-शराबे के साधारण लोगों की असाधारण कहानियाँ कहते हैं। उनके पात्र पाठकों को अपने आसपास के ही लोग लगते हैं—उनकी खुशियाँ, दुख, संघर्ष और उम्मीदें हमारी अपनी प्रतीत होती हैं।
"मंदिर गाँव किनारे" समकालीन हिन्दी कहानी-साहित्य, ग्रामीण जीवन और मानवीय मूल्यों में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए एक महत्त्वपूर्ण एवं संग्रहणीय कृति है।
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