"प्रेमचंद का सम्पूर्ण बाल साहित्य" हिन्दी के उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की बालोपयोगी रचनाओं का एक महत्त्वपूर्ण और संग्रहणीय संकलन है, जिसका संपादन राजीव रंजन गिरी ने किया है। इस पुस्तक में प्रेमचंद द्वारा बच्चों के लिए लिखी गई कहानियों, प्रसंगों और प्रेरणादायक रचनाओं को एक साथ प्रस्तुत किया गया है, ताकि नई पीढ़ी उनके साहित्यिक वैभव और मानवीय मूल्यों से परिचित हो सके।
प्रेमचंद का बाल साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह बच्चों में ईमानदारी, करुणा, सहानुभूति, परिश्रम, आत्मसम्मान और सामाजिक संवेदनशीलता जैसे मूल्यों का विकास करता है। उनकी कहानियों के बाल पात्र जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी नैतिक साहस और मानवीय गरिमा का परिचय देते हैं।
इस संकलन में शामिल रचनाएँ बाल-मन की जिज्ञासाओं को समझते हुए उन्हें समाज, परिवार और मानवीय रिश्तों की बुनियादी समझ प्रदान करती हैं। "ईदगाह", "गुल्ली-डंडा", "बड़े भाई साहब" जैसी कालजयी रचनाओं की संवेदनात्मक विरासत प्रेमचंद को बच्चों का भी प्रिय लेखक बनाती है। प्रेमचंद का साहित्य भारतीय समाज की मिट्टी से जुड़ा हुआ है और बच्चों को जीवन के वास्तविक मूल्यों से परिचित कराता है।
यह पुस्तक बच्चों, अभिभावकों, शिक्षकों, पुस्तकालयों और बाल साहित्य के शोधार्थियों के लिए एक अनिवार्य संग्रह है।
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