"स्कंदगुप्त" हिंदी साहित्य के महान नाटककार Jaishankar Prasad का एक कालजयी ऐतिहासिक नाटक है। यह नाटक गुप्त साम्राज्य के वीर सम्राट Skandagupta के जीवन, संघर्ष, राष्ट्रप्रेम और नेतृत्व पर आधारित है। इसे हिंदी नाट्य-साहित्य की सर्वश्रेष्ठ ऐतिहासिक कृतियों में गिना जाता है।
नाटक की कथा उस समय की है जब गुप्त साम्राज्य आंतरिक संघर्षों और बाहरी आक्रमणों से जूझ रहा था। स्कंदगुप्त अपने अदम्य साहस, राजनीतिक दूरदर्शिता और सैन्य कौशल के बल पर साम्राज्य की रक्षा करता है तथा विदेशी आक्रमणकारियों, विशेष रूप से हूणों के विरुद्ध संघर्ष का नेतृत्व करता है। यह कृति केवल एक राजा की कहानी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा का प्रेरक आख्यान है।
जयशंकर प्रसाद ने इतिहास को मात्र घटनाओं का विवरण न बनाकर उसे राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक गौरव से जोड़ा है। नाटक में वीरता, प्रेम, त्याग, कर्तव्य, राजनीति और मानवीय संवेदनाओं का संतुलित समन्वय मिलता है। स्कंदगुप्त का चरित्र राष्ट्रहित को व्यक्तिगत सुख से ऊपर रखने वाले आदर्श नेतृत्व का प्रतीक बनकर उभरता है।
भाषा ओजस्वी, काव्यमय और प्रभावपूर्ण है। संवादों में राष्ट्रीय भावना, आत्मगौरव और सांस्कृतिक चेतना का सशक्त स्वर सुनाई देता है। यही कारण है कि "स्कंदगुप्त" केवल एक ऐतिहासिक नाटक नहीं, बल्कि भारतीय राष्ट्रीय भावना का साहित्यिक दस्तावेज़ माना जाता है।
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