"आग का दरिया" उर्दू साहित्य की महानतम कृतियों में से एक और कुर्रतुलऐन हैदर की कालजयी रचना है। पहली बार 1959 में प्रकाशित यह उपन्यास भारतीय उपमहाद्वीप के लगभग ढाई हजार वर्षों के इतिहास को अपने व्यापक फलक पर समेटता है। इसे उर्दू साहित्य का महाकाव्यात्मक उपन्यास माना जाता है और इसकी तुलना अक्सर गेब्रियल गार्सिया मार्केज़ के "One Hundred Years of Solitude" से की जाती है।
यह उपन्यास चौथी शताब्दी ईसा पूर्व से लेकर भारत-विभाजन के बाद के दौर तक की यात्रा करता है। कहानी के केंद्र में चार प्रमुख पात्र—गौतम, चंपा, कमाल और सिरिल—हैं, जो अलग-अलग ऐतिहासिक कालखंडों में विभिन्न रूपों में सामने आते हैं। इनके माध्यम से लेखिका भारतीय सभ्यता, सांस्कृतिक सह-अस्तित्व, प्रेम, विस्थापन, पहचान और इतिहास के बदलते प्रवाह को प्रस्तुत करती हैं।
कुर्रतुलऐन हैदर ने इतिहास, मिथक, संस्मरण, पत्र, डायरी और दार्शनिक विमर्श जैसी विविध शैलियों का अद्भुत प्रयोग किया है। यह कृति पाठकों को यह सोचने पर विवश करती है कि धर्म, राष्ट्र और पहचान की सीमाओं से परे मनुष्य की साझा सांस्कृतिक विरासत क्या है।
"आग का दरिया" केवल एक उपन्यास नहीं, बल्कि भारतीय उपमहाद्वीप की सांस्कृतिक स्मृति, विभाजन की त्रासदी और मानव सभ्यता की निरंतरता का विराट आख्यान है। इतिहास, दर्शन और गंभीर साहित्य के पाठकों के लिए यह एक अनिवार्य पठनीय कृति है।
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