Karmbhumi

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  • Format: Paper Back
  • Publish Years: 2026
  • Total page: 385
  • Language: HINDI

कर्मभूमि हिंदी साहित्य के अमर कथाकार और उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की सर्वाधिक विचारोत्तेजक और प्रेरणादायी कृतियों में से एक है। सन् 1932 में प्रकाशित यह उपन्यास भारतीय समाज, राजनीति और संस्कृति के संक्रमणकाल का सशक्त दस्तावेज़ है। प्रेमचंद ने इस रचना के माध्यम से स्वतंत्रता आंदोलन, सामाजिक विषमता, जातिगत भेदभाव, धार्मिक पाखंड, आर्थिक शोषण और मानवीय मूल्यों के संकट जैसे ज्वलंत प्रश्नों को अत्यंत संवेदनशीलता और यथार्थवाद के साथ प्रस्तुत किया है।

उपन्यास का केंद्रीय पात्र अमरकांत एक आदर्शवादी, संवेदनशील और सत्यनिष्ठ युवक है, जो जीवन को केवल व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं तक सीमित नहीं मानता। वह समाज में व्याप्त अन्याय, असमानता और शोषण के विरुद्ध संघर्ष का मार्ग चुनता है। अमरकांत का विश्वास है कि मनुष्य का वास्तविक धर्म मानवता की सेवा और सत्य के प्रति निष्ठा में निहित है। इसी विश्वास के कारण वह किसानों, मजदूरों और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष करता है तथा समाज में जागरूकता और परिवर्तन लाने का प्रयास करता है।

अमरकांत की पत्नी सुखदा प्रारंभ में अपेक्षाकृत व्यावहारिक और पारंपरिक दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करती है। दोनों के विचारों में गहरा अंतर होने के कारण उनके वैवाहिक जीवन में अनेक संघर्ष उत्पन्न होते हैं। किंतु उपन्यास के विकास के साथ सुखदा का चरित्र भी उल्लेखनीय परिवर्तन से गुजरता है और वह सामाजिक चेतना तथा जनसेवा के महत्व को समझने लगती है। इस प्रकार प्रेमचंद ने स्त्री-चरित्रों को भी केवल सहायक भूमिका में न रखकर सामाजिक परिवर्तन की सक्रिय शक्ति के रूप में चित्रित किया है।

कर्मभूमि केवल एक व्यक्ति की कथा नहीं, बल्कि उस युग के भारतीय समाज की सामूहिक चेतना का आख्यान है। इसमें स्वतंत्रता आंदोलन की पृष्ठभूमि, गांधीवादी विचारधारा, सत्य और अहिंसा के सिद्धांत, सामाजिक न्याय की आकांक्षा तथा राष्ट्रीय पुनर्जागरण की भावना का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। प्रेमचंद ने यह दिखाने का प्रयास किया है कि समाज का वास्तविक उत्थान केवल राजनीतिक स्वतंत्रता से नहीं, बल्कि सामाजिक समानता, नैतिक जागरण और मानवीय संवेदनाओं के विकास से संभव है।

इस उपन्यास का मूल संदेश अत्यंत सरल किंतु गहन हैमनुष्य का सच्चा धर्म कर्म है। निस्वार्थ सेवा, सत्यनिष्ठा, कर्तव्यपरायणता और मानवता के प्रति समर्पण ही जीवन की सर्वोच्च साधना है। यही कारण है कि कर्मभूमि आज भी उतनी ही प्रासंगिक प्रतीत होती है जितनी अपने प्रकाशन काल में थी।

सामाजिक यथार्थ, आदर्शवाद, मानवीय संवेदना और राष्ट्रीय चेतना के अद्भुत समन्वय के कारण कर्मभूमि हिंदी साहित्य की एक कालजयी कृति मानी जाती है, जो पाठकों को केवल मनोरंजन ही नहीं, बल्कि जीवन और समाज के प्रति गहन चिंतन की प्रेरणा भी प्रदान करती है।

मुख्य विशेषताएँ (Product Highlights):
सामाजिक और आर्थिक असमानता का सशक्त चित्रण
जातिवाद, छुआछूत और धार्मिक पाखंड पर प्रहार
नारी चेतना, स्वतंत्रता और सामाजिक भागीदारी का प्रभावशाली प्रस्तुतीकरण
आदर्शवाद और व्यवहारिक जीवन के बीच संघर्ष का यथार्थ चित्रण
सत्य, अहिंसा, त्याग और कर्मयोग की महत्ता पर बल
किसानों, मजदूरों और वंचित वर्गों के संघर्ष की मार्मिक अभिव्यक्ति
गांधीवादी विचारधारा और राष्ट्रीय चेतना का प्रभावशाली दस्तावेज़
प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ सामाजिक-राजनीतिक कृतियों में से एक

 

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Leslie Alexander
February 10, 2024 at 2:37 pm

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