GABAN

(0 Customer Reviews)

₹240

₹299 20% OFF
  • Format: Paper Back
  • Publish Years: 2026
  • Total page: 300
  • Language: HINDI

‘गबन’ हिंदी साहित्य के शिखर पुरुष मुंशी प्रेमचंद का एक अत्यंत महत्वपूर्ण सामाजिक-यथार्थवादी उपन्यास है, जो भारतीय मध्यवर्गीय समाज की मानसिकता, आर्थिक दबावों, सामाजिक प्रतिष्ठा की लालसा और नैतिक मूल्यों के द्वंद्व का अत्यंत मार्मिक एवं यथार्थपूर्ण चित्रण प्रस्तुत करता है। सन् 1931 में प्रकाशित यह उपन्यास प्रेमचंद की उन कालजयी कृतियों में गिना जाता है, जिनमें भारतीय समाज के अंतर्विरोधों और मानवीय चरित्र की जटिलताओं का गहन विश्लेषण मिलता है।

उपन्यास का केंद्रबिंदु रमानाथ और उसकी पत्नी जालपा हैं। जालपा को आभूषणों से विशेष लगाव है और रमानाथ अपनी सीमित आर्थिक स्थिति के बावजूद उसकी इच्छाओं को पूरा करने तथा समाज में प्रतिष्ठित दिखाई देने की आकांक्षा रखता है। यही आकांक्षा धीरे-धीरे उसे ऐसे मार्ग पर ले जाती है जहाँ वह आर्थिक अनियमितताओं और नैतिक पतन की ओर बढ़ता चला जाता है। परिस्थितियाँ इस हद तक पहुँच जाती हैं कि वह गबन जैसे अपराध में उलझ जाता है और उसका जीवन संकटों से घिर जाता है।

प्रेमचंद ने इस कथा के माध्यम से केवल एक व्यक्ति के अपराध की कहानी नहीं कही है, बल्कि उस सामाजिक व्यवस्था की पड़ताल की है जहाँ दिखावा, झूठी प्रतिष्ठा और भौतिक आकर्षण व्यक्ति को अपने मूल्यों से दूर कर देते हैं। उपन्यास यह प्रश्न उठाता है कि क्या समाज में सम्मान केवल धन और बाहरी आडंबर से प्राप्त होता है, अथवा उसका आधार चरित्र, सत्यनिष्ठा और नैतिकता होनी चाहिए।

‘गबन’ की सबसे बड़ी विशेषता इसका मनोवैज्ञानिक और सामाजिक विश्लेषण है। प्रेमचंद अपने पात्रों के भीतर चल रहे संघर्षों को इतनी सूक्ष्मता से चित्रित करते हैं कि पाठक स्वयं को उनके साथ जुड़ा हुआ महसूस करता है। रमानाथ का अपराध केवल कानूनी अपराध नहीं, बल्कि सामाजिक दबावों और व्यक्तिगत कमजोरियों का परिणाम बनकर सामने आता है। वहीं जालपा का चरित्र विकास इस उपन्यास की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक है। वह आभूषण-प्रेमी युवती से आत्मचेतस, संवेदनशील और जिम्मेदार स्त्री के रूप में विकसित होती है।

उपन्यास में तत्कालीन भारतीय समाज, औपनिवेशिक शासन, राष्ट्रीय चेतना, स्त्री की स्थिति, आर्थिक विषमता और मध्यवर्गीय जीवन की समस्याओं का सजीव चित्रण मिलता है। प्रेमचंद ने सरल, प्रवाहपूर्ण और प्रभावशाली भाषा में जीवन के गहरे यथार्थ को अभिव्यक्त किया है। उनकी लेखनी समाज के उन पक्षों को उजागर करती है जो आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उनके समय में थे।

‘गबन’ केवल एक सामाजिक उपन्यास नहीं, बल्कि मानवीय दुर्बलताओं, नैतिक संघर्षों और आत्मबोध की गहन कथा है। यह पाठकों को जीवन के मूल्यों, सामाजिक प्रतिष्ठा के वास्तविक अर्थ और व्यक्ति की नैतिक जिम्मेदारियों पर विचार करने के लिए प्रेरित करता है। हिंदी साहित्य, भारतीय समाज और प्रेमचंद के रचनात्मक संसार को समझने के लिए यह उपन्यास एक अनिवार्य और संग्रहणीय कृति है।

Related Products

KHADANER CHUPKOTHA BY PALASH PODDAR
  • 20% OFF
Apsara By Suryakant Tripathi Nirala
  • 10% OFF
Alka By Suryakant Tripathi Nirala
  • 10% OFF
Kapalkundala (Hindi)
  • 20% OFF

Kapalkundala (Hindi)

  • ₹240
  • ₹299
KAB TAK PUKARUN
  • 20% OFF

KAB TAK PUKARUN

  • ₹240
  • ₹299
Karmbhumi
  • 20% OFF

Karmbhumi

  • ₹240
  • ₹299
GANGA RATAN BIDESHI
  • 10% OFF

GANGA RATAN BIDESHI

  • ₹252
  • ₹280
GABAN
  • 20% OFF

GABAN

  • ₹240
  • ₹299
🛒 Your Shopping Cart