"आश्रय" प्रसिद्ध लेखिका बेला मुखर्जी का एक संवेदनशील और मनोवैज्ञानिक उपन्यास है, जो स्त्री-पुरुष संबंधों, भावनात्मक जटिलताओं और आत्म-खोज की प्रक्रिया को गहराई से चित्रित करता है। यह उपन्यास मानवीय रिश्तों के उन सूक्ष्म आयामों को सामने लाता है, जिन्हें अक्सर समाज की परंपरागत धारणाओं के बीच अनदेखा कर दिया जाता है।
कहानी के केंद्र में प्रोफेसर कुमार हैं, जो अपने जीवन में आई विभिन्न स्त्रियों के साथ संबंधों के माध्यम से स्वयं को और स्त्री-मन को समझने का प्रयास करते हैं। उपन्यास एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठाता है—"एक स्त्री के कितने चेहरे होते हैं?" माँ, बेटी, पत्नी, प्रेमिका, मित्र और एक स्वतंत्र व्यक्तित्व के रूप में स्त्री की बहुआयामी पहचान को लेखिका ने अत्यंत संवेदनशीलता और सूक्ष्म दृष्टि से प्रस्तुत किया है।
बेला मुखर्जी की भाषा सहज, प्रवाहपूर्ण और भावनात्मक गहराई से परिपूर्ण है। वे पात्रों के अंतर्द्वंद्व, अकेलेपन, प्रेम, अपेक्षाओं और आत्मसम्मान को इतनी बारीकी से उकेरती हैं कि पाठक स्वयं को कहानी का हिस्सा महसूस करने लगता है। यह उपन्यास केवल रिश्तों की कहानी नहीं, बल्कि मनुष्य की भावनात्मक सुरक्षा और "आश्रय" की तलाश का भी प्रतीकात्मक आख्यान है।
"आश्रय" मनोवैज्ञानिक कथा-साहित्य, स्त्री-विमर्श और गंभीर हिन्दी उपन्यासों के पाठकों के लिए एक संग्रहणीय कृति है।
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