DESH BHEETAR DESH

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  • Format: Paper Back
  • Publish Years: 2026
  • Total page: 168
  • Language: HINDI

"देश भीतर देश" चर्चित कथाकार और पत्रकार प्रदीप सौरभ का एक महत्त्वपूर्ण सामाजिक-राजनीतिक उपन्यास है, जो भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र की जटिल वास्तविकताओं, क्षेत्रीय अस्मिताओं और राष्ट्रीय एकता के बीच मौजूद तनावों को केंद्र में रखकर लिखा गया है। यह उपन्यास उन "देशों की कहानी" कहता है, जो एक ही देश की सीमाओं के भीतर रहते हुए भी अपने इतिहास, संस्कृति, भाषा और अनुभवों के कारण स्वयं को अलग महसूस करते हैं।

उपन्यास की कथा असम और पूर्वोत्तर भारत के सात राज्यों की पृष्ठभूमि में विकसित होती है। लेखक ने वहाँ के सामाजिक संघर्ष, अलगाववादी भावनाओं, नक्सलवाद, असुरक्षा, सैन्य उपस्थिति और मुख्यधारा भारत से दूरी की अनुभूति को अत्यंत संवेदनशीलता और यथार्थपरक दृष्टि से चित्रित किया है। यह हिंदी साहित्य की उन विरल कृतियों में है, जिसने पूर्वोत्तर भारत को अपनी कथा का केंद्र बनाया।

उपन्यास का नायक विनय केवल एक पात्र नहीं, बल्कि संवाद और समझ की संभावना का प्रतीक है। वह पूर्वोत्तर के समाज से जुड़ने का प्रयास करता है और प्रेम, विश्वास तथा मानवीय संबंधों के माध्यम से उन दूरियों को कम करने की कोशिश करता है, जिन्हें राजनीति और हिंसा ने गहरा कर दिया है।

"देश भीतर देश" यह प्रश्न उठाता है कि क्या केवल कानून, सेना और प्रशासनिक नियंत्रण के सहारे राष्ट्रीय एकता स्थापित की जा सकती है? क्या दिलों की दूरियों को बंदूकें समाप्त कर सकती हैं? लेखक का संकेत स्पष्ट है कि संवाद, संवेदना और पारस्परिक सम्मान ही किसी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति होते हैं।

प्रदीप सौरभ की भाषा पत्रकारिता की तीक्ष्णता और साहित्य की संवेदनशीलता का अद्भुत संगम है। वे तथ्यों और मानवीय अनुभवों को इस तरह जोड़ते हैं कि उपन्यास केवल राजनीतिक विमर्श नहीं रह जाता, बल्कि मनुष्य की पहचान, प्रेम और अपनत्व की खोज का आख्यान बन जाता है।

"देश भीतर देश" केवल पूर्वोत्तर भारत की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस भारत का दर्पण है, जहाँ विविधताओं के बीच एकता की तलाश आज भी जारी है। यह उपन्यास पाठकों को राष्ट्र, पहचान और लोकतंत्र के अर्थ पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित करता है।

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Leslie Alexander
February 10, 2024 at 2:37 pm

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