"गांधी और सरलादेवी चौधरानी : बारह अध्याय" सुप्रसिद्ध कथाकार Alka Saraogi का एक महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक-औपन्यासिक आख्यान है, जिसमें भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दो जटिल और चर्चित व्यक्तित्वों—Mahatma Gandhi और Sarala Devi Chaudhurani—के संबंधों, वैचारिक संवादों और भावनात्मक निकटता का संवेदनशील चित्रण किया गया है। यह कृति इतिहास के हाशिए पर छूट गई एक असाधारण स्त्री के व्यक्तित्व को केंद्र में लाने का प्रयास करती है।
उपन्यास का केंद्र केवल गांधी और सरला देवी के संबंध नहीं हैं, बल्कि वह समूचा ऐतिहासिक दौर है जिसमें स्वतंत्रता आंदोलन, स्त्री-चेतना, राष्ट्रवाद, नैतिकता और निजी जीवन के प्रश्न एक-दूसरे से टकराते दिखाई देते हैं। अलका सरावगी ने सरला देवी को केवल "गांधी की निकट सहयोगी" या "प्रेमिका" के रूप में नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र विचारक, राष्ट्रवादी कार्यकर्ता, लेखिका और प्रश्न उठाने वाली प्रखर स्त्री के रूप में प्रस्तुत किया है।
सरलादेवी चौधरानी बंगाल के प्रसिद्ध टैगोर परिवार से थीं। वे शिक्षित, प्रतिभाशाली और राष्ट्रीय चेतना से संपन्न महिला थीं। उपन्यास यह प्रश्न उठाता है कि इतिहास-लेखन में उनके योगदान को अपेक्षित स्थान क्यों नहीं मिला। लेखिका उनके व्यक्तित्व, वैचारिक संघर्षों और गांधी के साथ उनके जटिल संबंधों के माध्यम से भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के अनेक अनदेखे पहलुओं को उजागर करती हैं।
साहित्यिक दृष्टि से यह कृति इतिहास और उपन्यास का सुंदर संगम है। अलका सरावगी ने दस्तावेज़ों, पत्रों और ऐतिहासिक संदर्भों का उपयोग करते हुए एक ऐसी कथा रची है जो तथ्य और कल्पना के बीच संतुलन बनाए रखती है। भाषा परिपक्व, शोधपरक और संवेदनशील है, जबकि कथा में स्त्री-विमर्श, प्रेम, राजनीति और नैतिकता के प्रश्न गहराई से जुड़े हुए हैं।
"गांधी और सरलादेवी चौधरानी : बारह अध्याय" केवल एक ऐतिहासिक उपन्यास नहीं, बल्कि इतिहास के भूले-बिसरे पात्रों, स्त्री-अस्मिता और स्वतंत्रता आंदोलन के मानवीय पक्ष को समझने वाली एक महत्त्वपूर्ण साहित्यिक कृति है।
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