GODAN

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  • Format: Paper Back
  • Publish Years: 2026
  • Total page: 416
  • Language: HINDI

गोदान हिंदी साहित्य के महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ और सर्वाधिक चर्चित कृतियों में से एक है। यह केवल एक उपन्यास नहीं, बल्कि भारतीय ग्रामीण जीवन, सामाजिक संरचना, आर्थिक विषमता और मानवीय संघर्षों का ऐसा महाकाव्य है, जो अपने समय की सीमाओं को लांघकर आज भी उतना ही प्रासंगिक और प्रभावशाली बना हुआ है। भारतीय किसान जीवन की त्रासदी, सामाजिक अन्याय और मानवीय संवेदनाओं का जितना सशक्त चित्रण इस उपन्यास में मिलता है, वैसा हिंदी साहित्य में विरल है।

उपन्यास का केंद्रीय पात्र होरी महतो एक साधारण किसान है, जिसकी सबसे बड़ी आकांक्षा एक गाय का स्वामी बनने और धर्मसम्मत जीवन जीने की है। किंतु गरीबी, कर्ज, सामाजिक दबाव, जमींदारी शोषण और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच उसका यह साधारण-सा सपना भी अधूरा रह जाता है। होरी का जीवन भारतीय किसान की उस नियति का प्रतीक बन जाता है, जो अथक परिश्रम करने के बावजूद सम्मानजनक जीवन से वंचित रहता है। उसकी पत्नी धनिया भारतीय ग्रामीण स्त्री की शक्ति, साहस, संघर्ष और आत्मसम्मान का सशक्त प्रतीक है, जो हर कठिन परिस्थिति में अपने परिवार को संभाले रखती है।

गोदानकेवल होरी और धनिया की कथा नहीं है। यह पूरे भारतीय समाज की बहुआयामी तस्वीर प्रस्तुत करता है। प्रेमचंद ने गाँव और शहर, किसान और जमींदार, श्रम और पूंजी, परंपरा और आधुनिकता, स्त्री और पुरुष के बीच मौजूद सामाजिक एवं आर्थिक अंतर्विरोधों को अत्यंत यथार्थवादी दृष्टि से चित्रित किया है। उपन्यास में ग्रामीण भारत की निर्धनता, महाजनी शोषण, जातिगत भेदभाव, सामाजिक रूढ़ियाँ और धार्मिक पाखंड के साथ-साथ शहरी जीवन की कृत्रिमता, नैतिक संकट और वर्गीय संघर्ष भी समान रूप से उपस्थित हैं।

प्रेमचंद की लेखनी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे अपने पात्रों को केवल कथा के उपकरण के रूप में नहीं, बल्कि जीवंत मनुष्यों के रूप में प्रस्तुत करते हैं। होरी, धनिया, गोबर, झुनिया, रायसाहब, मेहता और मालती जैसे पात्र अपने समय और समाज के प्रतिनिधि बनकर सामने आते हैं। उनकी खुशियाँ, पीड़ाएँ, सपने और संघर्ष पाठक के भीतर गहरी संवेदना उत्पन्न करते हैं।

यह उपन्यास भारतीय किसान की उस विडंबना को उजागर करता है, जिसमें वह अन्नदाता होकर भी भूखा रहता है, श्रम का सृजनकर्ता होकर भी सम्मान से वंचित रहता है और जीवन भर संघर्ष करने के बाद भी अपने सपनों को पूरा नहीं कर पाता। गोदानआर्थिक असमानता, वर्गीय शोषण और सामाजिक अन्याय के विरुद्ध एक मौन किंतु अत्यंत प्रभावशाली दस्तावेज है।

साहित्यिक दृष्टि से गोदानयथार्थवाद की उत्कृष्ट कृति है। इसकी भाषा सरल, प्रवाहपूर्ण और जनजीवन से जुड़ी हुई है। प्रेमचंद ने ग्रामीण परिवेश, लोकसंस्कृति, मानवीय मनोविज्ञान और सामाजिक यथार्थ को जिस गहराई और संवेदनशीलता के साथ चित्रित किया है, वह इसे विश्वस्तरीय उपन्यासों की श्रेणी में स्थापित करता है।

गोदान केवल एक साहित्यिक कृति नहीं, बल्कि भारतीय समाज की आत्मकथा है। यह उपन्यास पाठकों को अपने समय, समाज और जीवन की वास्तविकताओं से परिचित कराता है तथा न्याय, समानता, मानवीय गरिमा और सामाजिक परिवर्तन के प्रश्नों पर गंभीर चिंतन के लिए प्रेरित करता है। यही कारण है कि इसे हिंदी साहित्य की सबसे महान और कालजयी कृतियों में गिना जाता है।

यदि आप भारतीय समाज, ग्रामीण जीवन, किसान संघर्ष और मानवीय संवेदनाओं को उनकी सम्पूर्ण गहराई में समझना चाहते हैं, तो गोदान आपके पुस्तकालय की अनिवार्य पुस्तक है।

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Leslie Alexander
February 10, 2024 at 2:37 pm

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