Lakhima Ki Aankhen

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  • Format: Paper Back
  • Publish Years: 2026
  • Total page: 130
  • Language: HINDI

‘लखिमा की आँखें’ हिंदी साहित्य के यशस्वी कथाकार रांगेय राघव का एक महत्वपूर्ण जीवनीपरक-ऐतिहासिक उपन्यास है, जो मध्यकालीन भारत के महान मैथिली कवि विद्यापति ठाकुर के जीवन, व्यक्तित्व और काव्य-संसार पर आधारित है। रांगेय राघव ने कवियों, संतों और ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के जीवन को उपन्यासात्मक रूप में प्रस्तुत करने की जो विशिष्ट परंपरा विकसित की, ‘लखिमा की आँखें’ उसकी श्रेष्ठ कड़ियों में से एक है। इस उपन्यास में उन्होंने विद्यापति के जीवन, उनकी प्रेमानुभूति, काव्य-साधना तथा मिथिला के सांस्कृतिक परिवेश को अत्यंत सजीव रूप में चित्रित किया है।

उपन्यास का केंद्र महाकवि विद्यापति हैं, जिनकी काव्य प्रतिभा ने मैथिली साहित्य को अमर गौरव प्रदान किया। उनकी रचनाओं में प्रेम, भक्ति, सौंदर्य और मानवीय संवेदनाओं का अद्भुत समन्वय मिलता है। रांगेय राघव ने इस उपन्यास में कवि के जीवन को केवल ऐतिहासिक घटनाओं के रूप में नहीं, बल्कि एक संवेदनशील कलाकार की आंतरिक यात्रा के रूप में प्रस्तुत किया है।

उपन्यास के शीर्षक में निहित ‘लखिमा’ केवल एक पात्र नहीं, बल्कि प्रेरणा, सौंदर्य और भाव-जगत का प्रतीक बनकर उभरती है। उसकी आँखें कवि के जीवन में उस सौंदर्य-बोध और भाव-जागरण का माध्यम हैं, जिससे उनकी काव्य-प्रतिभा को नई दिशा मिलती है। रांगेय राघव ने प्रेम को यहाँ केवल व्यक्तिगत आकर्षण के रूप में नहीं, बल्कि सृजन की शक्ति और आत्मानुभूति के स्रोत के रूप में चित्रित किया है।

इस कृति में मिथिला के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक जीवन का भी अत्यंत प्रभावशाली चित्रण मिलता है। राजदरबारों का वातावरण, धार्मिक मान्यताएँ, लोकजीवन, सांस्कृतिक परंपराएँ और तत्कालीन समाज की जटिलताएँ कथा को व्यापक ऐतिहासिक संदर्भ प्रदान करती हैं। लेखक ने गहन शोध के आधार पर विद्यापति के युग को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया है।

‘लखिमा की आँखें’ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें इतिहास और कल्पना का संतुलित समन्वय मिलता है। रांगेय राघव तथ्यात्मक आधार को बनाए रखते हुए पात्रों के मनोभावों, संघर्षों और संवेदनाओं को साहित्यिक ऊँचाई प्रदान करते हैं। परिणामस्वरूप पाठक केवल इतिहास नहीं पढ़ता, बल्कि उस युग को जीने लगता है।

उपन्यास में प्रेम और भक्ति के बीच का संबंध भी अत्यंत सूक्ष्मता से उभरता है। विद्यापति के काव्य में जिस माधुर्य, लालित्य और रागात्मकता का दर्शन होता है, लेखक ने उसे कथा के माध्यम से मूर्त रूप देने का प्रयास किया है। इस प्रकार यह कृति कवि के जीवन और उनकी रचनात्मक चेतना दोनों को समझने का अवसर प्रदान करती है।

रांगेय राघव की भाषा यहाँ अत्यंत साहित्यिक, चित्रात्मक और भावप्रवण है। वे मिथिला की संस्कृति, लोक-परंपराओं और मानवीय संबंधों को ऐसी संवेदनशीलता से चित्रित करते हैं कि उपन्यास पाठक के मन पर स्थायी प्रभाव छोड़ता है।

‘लखिमा की आँखें’ केवल महाकवि विद्यापति की जीवनी नहीं, बल्कि प्रेम, सौंदर्य, सृजन और सांस्कृतिक चेतना की एक मार्मिक साहित्यिक गाथा है। यह उपन्यास हिंदी साहित्य के उन महत्वपूर्ण जीवनीपरक उपन्यासों में गिना जाता है, जो इतिहास और साहित्य के बीच एक सुंदर सेतु का निर्माण करते हैं।

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Leslie Alexander
February 10, 2024 at 2:37 pm

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