"मैं रवीन्द्रनाथ की पत्नी" (मूल बांग्ला: Ami Rabindranather Stri) प्रसिद्ध बांग्ला साहित्यकार Ranjan Bandyopadhyay का चर्चित ऐतिहासिक-जीवनीपरक उपन्यास है। यह कृति विश्वकवि Rabindranath Tagore की पत्नी Mrinalini Devi के जीवन को केंद्र में रखकर लिखी गई है। उपन्यास इतिहास के उन मौन पन्नों को आवाज़ देता है, जहाँ एक महान पुरुष की छाया में रह गई स्त्री की पीड़ा, प्रेम, अकेलापन और आत्मसंघर्ष दर्ज है।
यह उपन्यास मृणालिनी देवी की दृष्टि से रवीन्द्रनाथ ठाकुर के जीवन और ठाकुरबाड़ी की दुनिया को देखने का प्रयास करता है। बाल-विवाह, पारिवारिक जिम्मेदारियाँ, सामाजिक बंधन और एक असाधारण प्रतिभा के साथ जीवन बिताने की जटिलताओं को लेखकीय संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया गया है। कथा यह प्रश्न भी उठाती है कि इतिहास महान व्यक्तियों को तो याद रखता है, लेकिन उनके साथ जीवन बिताने वाले लोगों की भावनाओं और संघर्षों को अक्सर भुला देता है।
रंजन बंद्योपाध्याय ने ऐतिहासिक तथ्यों, पत्रों, संस्मरणों और रचनात्मक कल्पना का संयोजन करते हुए एक ऐसी कथा रची है, जो केवल जीवनी नहीं बल्कि एक स्त्री के अंतर्मन की यात्रा बन जाती है। उपन्यास में प्रेम, उपेक्षा, त्याग, आत्मसम्मान और स्त्री-अस्तित्व के प्रश्न गहराई से उभरते हैं।
साहित्यिक दृष्टि से यह कृति इतिहास, स्त्री-विमर्श और जीवनीपरक कथा-साहित्य का महत्वपूर्ण संगम है। रवीन्द्रनाथ ठाकुर के जीवन को एक नए कोण से देखने का अवसर प्रदान करने के साथ-साथ यह पुस्तक उन स्त्रियों की कहानी भी कहती है, जिनका योगदान इतिहास के मुख्य आख्यानों में अक्सर अदृश्य रह जाता है।
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