‘मेरी भव बाधा हरो’ हिंदी साहित्य के प्रख्यात उपन्यासकार रांगेय राघव का एक महत्वपूर्ण जीवनीपरक-ऐतिहासिक उपन्यास है, जिसमें रीतिकाल के महान कवि बिहारीलाल के जीवन, व्यक्तित्व, काव्य-साधना और उनके युग का अत्यंत सजीव एवं कलात्मक चित्रण किया गया है। उपन्यास का शीर्षक बिहारी के प्रसिद्ध दोहे— “मेरी भव बाधा हरो, राधा नागरि सोय…” —से लिया गया है, जो उनकी भक्ति-भावना और काव्य-दृष्टि का प्रतीक माना जाता है।
रांगेय राघव ने इस कृति में केवल कवि बिहारी का जीवन-वृत्त प्रस्तुत नहीं किया, बल्कि उस समूचे सांस्कृतिक, साहित्यिक और राजनैतिक परिवेश को पुनर्जीवित किया है, जिसमें बिहारी ने अपनी अमर कृति ‘बिहारी सतसई’ की रचना की। उपन्यास पाठक को मुगलकालीन भारत, राजदरबारों की संस्कृति, कवियों के सम्मान, कला-संरक्षण और तत्कालीन सामाजिक जीवन के विविध आयामों से परिचित कराता है।
कथा में बिहारीलाल केवल एक श्रृंगार-कवि के रूप में नहीं, बल्कि संवेदनशील, प्रतिभाशाली और निरंतर आत्म-संघर्ष करने वाले मनुष्य के रूप में उभरते हैं। उनके जीवन में वैभव है, राजाश्रय है, यश है, किंतु साथ ही आंतरिक बेचैनी, आध्यात्मिक खोज और जीवन के गहरे अर्थों की तलाश भी है। रांगेय राघव ने उनके व्यक्तित्व की इन्हीं जटिल परतों को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से उद्घाटित किया है।
उपन्यास का एक महत्वपूर्ण पक्ष रीतिकालीन साहित्य और उसके सौंदर्यबोध का चित्रण है। बिहारी की काव्य-प्रतिभा, नायिका-भेद, श्रृंगार-चित्रण, अलंकारिक सौंदर्य तथा भाषा की सूक्ष्मता को कथा के माध्यम से जीवंत बनाया गया है। साथ ही कवि केशवदास, अब्दुर्रहीम खानखाना और अन्य समकालीन साहित्यकारों के प्रसंग भी उपन्यास को ऐतिहासिक प्रामाणिकता और साहित्यिक विस्तार प्रदान करते हैं।
रांगेय राघव की विशेषता यह है कि वे इतिहास को केवल घटनाओं का संग्रह नहीं मानते, बल्कि उसके भीतर छिपे मानवीय अनुभवों को खोजते हैं। ‘मेरी भव बाधा हरो’ में भी वे बिहारी के जीवन के माध्यम से कला और सत्ता, वैभव और वैराग्य, प्रेम और भक्ति, तथा यश और आत्मबोध के शाश्वत द्वंद्वों को सामने लाते हैं। इस दृष्टि से यह उपन्यास केवल एक कवि की जीवनी नहीं, बल्कि सृजनशील मनुष्य की आत्मिक यात्रा का आख्यान बन जाता है।
भाषा की दृष्टि से कृति अत्यंत साहित्यिक, प्रभावशाली और सांस्कृतिक गरिमा से संपन्न है। रांगेय राघव ने रीतिकालीन वातावरण को पुनर्सृजित करते हुए भी कथा को आधुनिक पाठकों के लिए रोचक और सुलभ बनाए रखा है। परिणामस्वरूप यह उपन्यास इतिहास, साहित्य और जीवनी का सुंदर संगम बन जाता है।
‘मेरी भव बाधा हरो’ हिंदी साहित्य की उन विशिष्ट कृतियों में से है, जो पाठक को एक महान कवि के जीवन के साथ-साथ भारतीय काव्य-परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और मानवीय संवेदनाओं की गहराई से भी परिचित कराती हैं। यह उपन्यास बिहारीलाल के जीवन और रीतिकालीन साहित्य को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण और पठनीय कृति है।
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