Path Ke Davedar

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  • Format: Paper Back
  • Publish Years: 2026
  • Total page: 276
  • Language: HINDI

पथ के दावेदार (मूल बंगला उपन्यास: पथेर दाबी) बंगला साहित्य के महान कथाकार शरतचंद्र चट्टोपाध्याय की सर्वाधिक चर्चित, क्रांतिकारी और वैचारिक कृतियों में से एक है। यह उपन्यास केवल एक राजनीतिक कथा नहीं, बल्कि औपनिवेशिक भारत की स्वतंत्रता-चेतना, क्रांतिकारी संघर्ष, राष्ट्रीय अस्मिता और सामाजिक परिवर्तन के स्वप्न का सशक्त दस्तावेज़ है। अपने प्रकाशन के समय इस उपन्यास ने इतनी व्यापक प्रतिक्रिया उत्पन्न की कि ब्रिटिश सरकार ने इसे प्रतिबंधित तक कर दिया था। इससे इसकी वैचारिक शक्ति और जनप्रभाव का अनुमान लगाया जा सकता है।

उपन्यास का केंद्र है एक गुप्त क्रांतिकारी संगठनपथ के दावेदार, जिसका उद्देश्य केवल राजनीतिक स्वतंत्रता प्राप्त करना नहीं, बल्कि भारतीय समाज को हर प्रकार की गुलामी, अन्याय, अंधविश्वास और सामाजिक जड़ता से मुक्त करना है। इस संगठन के सदस्य मानते हैं कि स्वतंत्रता केवल शासन परिवर्तन का नाम नहीं है; यह मनुष्य की चेतना, समाज और राष्ट्र के संपूर्ण पुनर्निर्माण की प्रक्रिया है।

कथा का प्रमुख पात्र सव्यसाची भारतीय साहित्य के सबसे प्रभावशाली और रहस्यमय चरित्रों में से एक है। वह असाधारण बुद्धिमत्ता, अदम्य साहस, त्याग और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है। सव्यसाची केवल एक क्रांतिकारी नहीं, बल्कि एक विचार हैऐसा विचार जो अन्याय के विरुद्ध संघर्ष और स्वतंत्रता के लिए पूर्ण समर्पण का प्रतिनिधित्व करता है। उसके व्यक्तित्व में नेतृत्व, करुणा, अनुशासन और दूरदर्शिता का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है।

उपन्यास में प्रेम और क्रांति का संबंध भी अत्यंत सूक्ष्मता से चित्रित किया गया है। शरतचंद्र ने दिखाया है कि राष्ट्रीय संघर्ष के बीच भी मनुष्य का हृदय प्रेम, संवेदना और मानवीय संबंधों से रिक्त नहीं होता। स्त्री पात्रों को भी लेखक ने अत्यंत सशक्त रूप में प्रस्तुत किया है। वे केवल सहायक भूमिका में नहीं हैं, बल्कि स्वतंत्र विचार, साहस और राष्ट्रप्रेम से संपन्न व्यक्तित्व के रूप में सामने आती हैं। यह दृष्टि शरतचंद्र की प्रगतिशील सामाजिक चेतना को प्रकट करती है।

पथ के दावेदारकेवल अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष की कहानी नहीं है। यह उपन्यास भारतीय समाज की आंतरिक कमजोरियोंजातिगत भेदभाव, सामाजिक रूढ़ियों, मानसिक गुलामी और नैतिक पतनकी भी आलोचना करता है। लेखक का विश्वास है कि जब तक समाज भीतर से मजबूत नहीं होगा, तब तक राजनीतिक स्वतंत्रता भी अधूरी रहेगी।

शरतचंद्र की भाषा सरल, प्रवाहपूर्ण और भावनात्मक है, किंतु इस उपन्यास में उनकी शैली विशेष रूप से ओजस्वी और प्रेरणादायक बन जाती है। कथा में रोमांच, रहस्य, वैचारिक बहस, मानवीय संवेदना और क्रांतिकारी उत्साह का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। यही कारण है कि यह उपन्यास केवल साहित्यिक कृति नहीं, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन की वैचारिक धारा का भी एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ माना जाता है।

पथ के दावेदारआज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना अपने समय में था। यह कृति पाठकों को स्वतंत्रता, न्याय, सामाजिक परिवर्तन और मानवीय गरिमा के प्रश्नों पर गंभीर चिंतन के लिए प्रेरित करती है। राष्ट्रप्रेम, त्याग, संघर्ष और परिवर्तन की चेतना से ओतप्रोत यह उपन्यास भारतीय साहित्य की अमूल्य धरोहर है।

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Leslie Alexander
February 10, 2024 at 2:37 pm

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